चारधाम यात्रा 2022 के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया मंगलवार को शुरू हो गई है। आगामी 19 नवंबर को धाम के कपाट विधि विधान के साथ बंद कर दिए जाएंगे। तो चलिए कपाट बंद होने के पहले आपको बताते हैं धाम के बारे में एक रोचक कहानी...
Badrinath Dham: आखिर बदरीनाथ में क्यों नहीं बजाया जाता भगवान विष्णु का प्रिय शंख?, पीछे है रोचक कहानी
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आचार्य विशंवर प्रसाद नौटियाल और दिनेश पुरोहित का कहना है कि इसके पीछे रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लॉक के सिल्ला गांव से जुड़ी प्राचीन मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि जब हिमालय क्षेत्र में असुरों का आतंक था।
तब, ऋषि-मुनि अपने आश्रमों में पूजा-अर्चना भी नहीं कर पाते थे। यही स्थिति साणेश्वर महाराज के मंदिर में भी थी। यहां जो भी ब्राह्मण पूजा-अर्चना को पहुंचते, राक्षस उन्हें अपना निवाला बना लेते। तब साणेश्वर महाराज ने अपने भाई अगस्त्य ऋषि से मदद मांगी।
एक दिन अगस्त्य ऋषि सिल्ला पहुंचे और साणेश्वर मंदिर में स्वयं पूजा-अर्चना करने लगे, लेकिन राक्षसों का उत्पात देखकर वह भी सहम गए। उन्होंने मां भगवती का ध्यान किया तो अगस्त्य ऋषि की कोख से कुष्मांडा देवी प्रकट हो गई। देवी ने त्रिशूल और कटार से वहां मौजूद राक्षसों का वध किया।
कहा जाता है कि देवी से बचने के लिए तब आतापी-बातापी नाम के दो राक्षस वहां से भाग निकले। तभी आतापी राक्षस मंदाकिनी नदी में छिप गया और बातापी राक्षस यहां से भागकर बदरीनाथ धाम में शंख में छिप गया। मान्यता है कि तभी से बदरीनाथ धाम में शंख बजना वर्जित कर दिया गया।
नोट: यह तथ्य पौराणिक कथाओं के अनुसार लिखें गए हैं। अमर उजाला इनकी पुष्टि नहीं करता।