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Badrinath Dham: आखिर बदरीनाथ में क्यों नहीं बजाया जाता भगवान विष्णु का प्रिय शंख?, पीछे है रोचक कहानी

Tue, 15 Nov 2022 06:03 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला नेटवर्क, चमोली
अमर उजाला नेटवर्क, चमोली Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 15 Nov 2022 06:03 PM IST
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Badrinath Dham Yatra 2022: Conch shell Not use in Badrinath Interesting Story
बदरीनाथ मंदिर (गोले में शंख की प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media/pixabay

चारधाम यात्रा 2022 के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया मंगलवार को शुरू हो गई है। आगामी 19 नवंबर को धाम के कपाट विधि विधान के साथ बंद कर दिए जाएंगे। तो चलिए कपाट बंद होने के पहले आपको बताते हैं धाम के बारे में एक रोचक कहानी...



Badrinath Dham: कैसे पड़ा बदरीनाथ का नाम? कपाट बंद होने से पहले जानें धाम के बारे में अद्भुत और अनोखी बातें

सभी मठ-मंदिरों में देवी-देवताओं का पूजा-अर्चना के साथ शंख ध्वनि से आह्वान किया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु को शंख की ध्वनि प्रिय होने के बाद भी उनके धाम भू-बैकुंठ में शंख नहीं बजाया जाता है। दरअसल, इसके पीछे एक पौराणिक मान्यता है।  

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Badrinath Dham Yatra 2022: Conch shell Not use in Badrinath Interesting Story
बदरीनाथ मंदिर - फोटो : Social media

आचार्य विशंवर प्रसाद नौटियाल और दिनेश पुरोहित का कहना है कि इसके पीछे रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लॉक के सिल्ला गांव से जुड़ी प्राचीन मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि जब हिमालय क्षेत्र में असुरों का आतंक था।

Badrinath Dham Yatra 2022: Conch shell Not use in Badrinath Interesting Story
बदरीनाथ - फोटो : अमर उजाला

तब, ऋषि-मुनि अपने आश्रमों में पूजा-अर्चना भी नहीं कर पाते थे। यही स्थिति साणेश्वर महाराज के मंदिर में भी थी। यहां जो भी ब्राह्मण पूजा-अर्चना को पहुंचते, राक्षस उन्हें अपना निवाला बना लेते।  तब साणेश्वर महाराज ने अपने भाई अगस्त्य ऋषि से मदद मांगी।

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Badrinath Dham Yatra 2022: Conch shell Not use in Badrinath Interesting Story
बदरीनाथ - फोटो : अमर उजाला

एक दिन अगस्त्य ऋषि सिल्ला पहुंचे और साणेश्वर मंदिर में स्वयं पूजा-अर्चना करने लगे, लेकिन राक्षसों का उत्पात देखकर वह भी सहम गए।  उन्होंने मां भगवती का ध्यान किया तो अगस्त्य ऋषि की कोख से कुष्मांडा देवी प्रकट हो गई। देवी ने त्रिशूल और कटार से वहां मौजूद राक्षसों का वध किया।

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Badrinath Dham Yatra 2022: Conch shell Not use in Badrinath Interesting Story
बदरीनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला

कहा जाता है कि देवी से बचने के लिए तब आतापी-बातापी नाम के दो राक्षस वहां से भाग निकले। तभी आतापी राक्षस मंदाकिनी नदी में छिप गया और बातापी राक्षस यहां से भागकर बदरीनाथ धाम में शंख में छिप गया। मान्यता है कि तभी से बदरीनाथ धाम में शंख बजना वर्जित कर दिया गया।

नोट: यह तथ्य पौराणिक कथाओं के अनुसार लिखें गए हैं। अमर उजाला इनकी पुष्टि नहीं करता।

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