बिजली के बिलों में गड़बड़ियां रोकने और विभागीय स्तर पर राजस्व हेराफेरी रोकने के लिए रेवेन्यू इंस्पेक्शन यूनिट (आरआईयू) की नजर रहेगी। ऊर्जा सचिव की अध्यक्षता में हुई यूपीसीएल बोर्ड बैठक में आरआईयू के गठन को मंजूरी दे दी है। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि अक्सर देखा जा रहा है कि बिजली के बिलों में गड़बड़ी होने से न सिर्फ उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है, बल्कि यूपीसीएल को भी समय पर बिल की राशि जमा न होने पर वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है।
अब नहीं होगी बिजली के बिलों में गड़बड़ी, उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर
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इसके अलावा विभागीय स्तर पर भी राजस्व में हेराफेरी की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। इसे रोकने के लिए आरआईयू के गठन का निर्णय लिया गया है। इसके लिए राज्य को चार जोन (देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी और रुद्रपुर) में बांटा गया है।
ऊर्जा सचिव ने बताया कि आरआईयू में सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंताओं, अधिशासी अभियंताओं, उपखंड अधिकारियों, वरिष्ठ लेखाधिकारियों, लेखाकारों, सहायक अभियंताओं, अवर अभियंताओं की नियुक्ति किया जाएगा। यह रिटायर्ड अधिकारी बिलों में गड़बड़ियों को तत्काल दूर करेंगे। साथ ही विभागीय स्तर पर राजस्व में की जा रही हेराफेरी पर भी औचक जांच करेंगे।
पिछले दिनों राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली के बिलों में गड़बड़ियों को लेकर यूपीसीएल अधिकारियों को फटकार लगाई थी। आयोग चेयरमैन व पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने आंकड़े पेश करते हुए बताया था कि एक साल के भीतर राज्य में बिजली बिलों में गड़बड़ी को लेकर शिकायत निवारण केंद्रों में 4500 शिकायतें उपभोक्ताओं ने दर्ज की थी।
इनमें से 3500 शिकायतों में यूपीसीएल को दोषी माना गया और उसे जुर्माना देना पड़ा। उसके बाद चेयरमैन ने निर्देश जारी किए थे कि बिलों में गड़बड़ियों को यूपीसीएल के स्तर पर ही निस्तारित किया जाए। ताकि यूपीसीएल को जुर्माना न भरना पड़े।