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यहां प्यासी धरती से पानी लूट रहा है जंगल

Fri, 09 Jun 2017 02:56 PM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Fri, 09 Jun 2017 02:56 PM IST
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dangerous forest looted water from land
forest - फोटो : amar ujala

जंगल प्यासी धरती को पानी, नमी और छांव देते हैं। तराई कें द्रीय के टांडा के जंगल में प्रकृति का यह साधारण नियम उलट गया है। यहां जंगल प्यासी धरती से पानी लूट रहा है। जंगल में जानवरों के पीने के लिए पानीनहीं बचा है। दूसरी तरफ, इसी जंगल में गर्मियों के सीजन में भी सैनिक फार्म में धान की मस्त खेती जंगल विभाग करने दे रहा है।

dangerous forest looted water from land
forest

खत्तों में लोग अब 21 फुट की गहराई से पानी लेने को मजबूर हैं और  वन विभाग संजय वन में ट्यूबवेल के जरिये हरियाली को बचाए हुए है। टांडा के आधे से अधिक जंगल में वन्य जीवों को मात्र एक खोदे गए तालाब से ही पानी मिल पा रहा है।

dangerous forest looted water from land
forest

टांडा के जंगल में 2017 में अब तक तीन हाथियों की मौत हो चुकी है। हल्द्वानी तराई केंद्रीय प्रभाग का यह जंगल पानी और हरियाली की कमी से जूझ रहा है। कभी यहां साल, शीशम, रोहणी, बांस आदि का साम्राज्य था। अब इस जंगल में पॉप्लर, यूकेलिप्टस, सागौन का राज है। इन पेड़ों के बीच में वन विभाग के वन प्रबंधन की कलई खुलकर सामने आ रही है।

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forest

हाल यह है कि आधे से अधिक जंगल के लिए सिर्फ एक खोदे गए तालाब का पानी ही उपलब्ध है। खस्सीभोज खत्ते के पास के इस तालाब में भी वन विभाग बोरिंग के जरिये भू जल डालता है। इसके अलावा रामपुर रोड पर हल्द्वानी रेंज में भी एक बड़ा तालाब खोदा गया था। इस तालाब में पानी नहीं है। चीड़खत्ते के पास के दो नाले, सापठानी खत्ते के पास दो नाले, खस्सीभोज खत्ते के पास के एक बड़े नाले, सैनिक फार्म के पीछे से निकलने वाले दो नाले सहित करीब 20 नाले इस क्षेत्र में हैं। ये सभी नाले मुहानों से ही सूखे हुए हैं।

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जंगल में करीब दो दर्जन पोखर भी हैं जो बिल्कुल सूखे हुए हैं। जंगल से पानी बिल्कुल ही सूख गया है। दूसरी ओर, वन विभाग की ओर से लीज पर दिए गए सैकड़ों हेक्टेयर के सैनिक फार्म में जून में धान की फसल ली जा रही है। जाहिर है कि इस फार्म से साल में कम से कम दो बार धान की फसल ली जा रही है। यह तब है जबकि भूजल के गिरते स्तर के कारण खत्तों में रह रहे लोगों को अब पानी पाने के लिए कुओं को पांच फुट और गहरा खोदना पड़ रहा है। पूरा जंगल बोरिंग और ट्यूबवेलों से अटा पड़ा है। संजय वन में ही वन विभाग ट्यूबवेल के जरिये अपनी नर्सरी और हरियाली को बचाए हुए है।

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