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अतिक्रमण पर हाईकोर्ट को गुमराह करते रहे देहरादून के पूर्व जिलाधिकारी!

Sun, 22 Jul 2018 09:18 AM IST
सुनीत द्विवेदी , अमर उजाला, देहरादून
सुनीत द्विवेदी , अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 22 Jul 2018 09:18 AM IST
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dehradun former dm give wrong information in high court about encroachment
nainital high court - फोटो : google

तो क्या राजधानी में अतिक्रमण को लेकर दून के पूर्व जिलाधिकारी हाईकोर्ट को गुमराह करते रहे? वर्ष 2013 और 2014 में तत्कालीन जिलाधिकारियों ने हाईकोर्ट में बाकायदा शपथ पत्र देकर बताया था कि शहर के फुटपाथों से 80 फीसदी अतिक्रमण हटाया जा चुका है।


 

dehradun former dm give wrong information in high court about encroachment
encroachment

साथ ही दोनों जिलाधिकारियों ने शपथ पत्र में दावा किया था कि बाकी अतिक्रमण को हटाने के लिए जल्द नीति बनाई जाएगी। लेकिन, इसके बाद कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में न केवल डीएम के शपथ पत्रों (एफिडेविट) को झुठलाया बल्कि शहर में अतिक्रमण को लेकर विस्तृत रिपोर्ट भी सौंपी। अतिक्रमण पर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया था और 18 जून को चार सप्ताह में शहर से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। 

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encroachment - फोटो : amar ujala

दो सिंतबर 2013 को तत्कालीन जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया था। उन्होंने बताया कि दो सिंतबर 2013 को दिए गए हाईकोर्ट के निर्देशों के क्रम में राजधानी देहरादून के फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने के लिए एक टीम का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि फुटपाथ से 80 फीसदी अतिक्रमण हटा दिया गया है, जिसकी उन्होंने वीडियो सीडी भी शपथ पत्र के साथ कोर्ट को सौंपी थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इसके बाद कोई फुटपाथ पर अतिक्रमण करने का प्रयास करता है तो उसे तुरंत हटा दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि नगर निगम को अतिक्रमण करने वालों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए थे। जिसके आधार पर प्रशासन अतिक्रमणकारियों के खिलाफ लोक संपत्ति विरुपण अधिनियम के तहत कार्रवाई कर सके, लेकिन निगम ने यह सूची तैयार कर अभी तक नहीं सौंपी है। 
 

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encroachment

2014 में तत्कालीन जिलाधिकारी चंद्रेश कुमार यादव ने कोर्ट में प्रति शपथ पत्र (काउंटर एफिडेविट) दाखिल कर बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए संयुक्त कार्ययोजना बनाने के लिए 10 जुलाई 2014 को प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, बिजली, सिंचाई, लोनिवि अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक बुलाई गई है। उन्होंने 2013 में तत्कालीन जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम की ओर से दिए गए शपथ पत्र को सही बताते हुए कार्रवाई की पुष्टि की। खास बात यह है कि इस शपथ पत्र में उन्होंने वर्ष 2014 में बैठक आयोजित करने के अलावा अतिक्रमण हटाने संबंधी कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने केवल 2013 में हुई कार्रवाई और उस दौरान हटाए गए अतिक्रमण की सूची ही कोर्ट के सामने रखी। 
 

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encroachment

हाईकोर्ट ने दो अप्रैल 2014 को बार एसोसिएशन देहरादून के तत्कालीन अध्यक्ष राजीव शर्मा को कोर्ट कमिश्नर बनाया था। जुलाई 2014 में उन्होंने रिपोर्ट सौंपकर बताया कि चकराता रोड, सहारनपुर रोड, नेहरू कॉलोनी, राजपुर रोड, करनपुर बाजार, आराघर और धर्मपुर क्षेत्र, हरिद्वार रोड, पलटन बाजार, डिस्पेंसरी रोड, हनुमान चौक, सरनीमल बाजार, तहसील और जामा मस्जिद, प्रेमनगर कैंट, सुभाष रोड क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है। उन्होंने प्रत्येक क्षेत्र का विस्तार से वर्णन भी किया। उन्होंने बताया कि प्रेमनगर बाजार में 30 से 40 फुट चौड़ी सड़क है, लेकिन अवैध कब्जों और निर्माण के कारण यह आठ से 10 फुट रह गई है। शहर में ठेली, रेहड़ी, फड़ जैसे अस्थाई अतिक्रमण के साथ ही बड़े पैमाने पर स्थाई और पक्का अतिक्रमण भी किया गया है। कई जगह पर ढाबों के तंदूर तक फुटपाथ पर लगाए गए हैं। 
 

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