ज्येष्ठ पूर्णिमा से एक दिन पहले बड़ा आकाशीय परिवर्तन हो रहा है। बुधवार को मंगल वक्री हो जाएंगे। इसी के साथ चंद्रमा धनु राशि में प्रवेश कर विष योग का निर्माण करेंगे। शनि की मकर राशि में वक्री होकर मंगल इस पूरे भूमंडल पर प्रभाव डालेंगे। जिन राशियों पर साढ़े सती चल रही हैं उन्हें आने वाले दिन काफी भारी पड़ सकते हैं।
वक्री होकर मंगल ग्रह बना रहा अमंगल योग, इन जातकाें के लिए शुरू होने वाला है बुरा समय
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आकाशीय घटनाएं समय-समय पर होती रहती हैं। इस समय मिथुन के सूर्य चल रहे हैं। सूर्य इस वर्ष के राजा भी हैं। वर्ष के मंत्री का पद क्रूर ग्रह माने वाले शनिदेव के पास है। ऐसे में गर्म ग्रह मंगल का वक्री हो जाना ज्योतिषीय दृष्टि से अमंगल की चेतावनी दे रहा है। विशेष बात यह है कि मकर राशि में चल रहे मंगल का वक्री होना लंबे समय तक चलेगा। आमतौर पर मंगल किसी एक राशि में 45 दिनों तक रहते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित उदय शंकर और मेदिनी ज्योतिष के अनुसार मंगल विगत दो मई को मकर राशि में आए थे, अब वह पांच नवंबर तक इसी राशि में बने रहेंगे। बुधवार को मंगल के वक्री होते ही आपदा और प्राकृतिक बाधाओं के केंद्र सक्रिय हो जाएंगे। यूं तो मंगल प्रत्येक ढाई वर्ष बाद वक्री होते हैं। इस बार उनका कार्यकाल मकर राशि में ही बहुत लंबा चल रहा है। प्रकृति के लिए एक और महत्वपूर्ण घटना यह है कि वक्री होने के पूरे समय मंगल की युति केतु के साथ रहेगी।
केतु भी बड़े क्रूर ग्रह है। मंगल का शनि की राशि में वक्री होना और शनि का पहले ही वक्री रहना ज्योतिष के अनुसार संकट को जन्म देने वाला है। मकर राशि मंगल की उच्च राशि है। उच्च राशि में वक्री होने का असर देशों की सीमाओं पर भी पड़ता है। मंगल की वक्री यात्रा भूमि, भवन, संकट और कर्ज बढ़ाने वाली है। शनि की ढैया से प्रभावित राशियों पर खासा प्रभाव पड़ने वाला है।
संयोग से 27 जून को चंद्रमा भी धनु राशि में प्रवेश कर विष योग का निर्माण कर रहे हैं। यह विष योग शनि और मंगल की गतियों से मिलकर राशियों के तीसरे, सातवें और दसवें स्थान पर प्रभाव डालते हैं। जिनकी जन्म कुंडली पहले ही मंगल वक्री होगा, उन पर खासा प्रभाव पड़ने वाला है। ग्रीष्म ऋतु भले ही वर्षा ऋतु में बदल गई हो किंतु मेघों की गति पर मंगल और शनि का प्रभाव बना रहेगा।