यादों में... 40 साल की सियासत में बेदाग रहने वाले काजी साहब
चालीस साल तक उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सियासत में सक्रिय रहे काजी मोहम्मद मोहियुद्दीन का सोमवार की देर रात इंतकाल हो गया। उत्तर प्रदेश में दो बार मंत्री और पांच बार विधायक रहने के बाद भी काजी की छवि बेदाग रही। उनके काम का अंदाज भी निराला था, जिस काम को उन्होंने हां कह दिया उसे कराकर ही दम लिया।
यादों में... 40 साल की सियासत में बेदाग रहने वाले काजी साहब
हाल में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने काजी को समाज कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष का पद सौंपा था। वर्ष 1974 में काजी मोहम्मद मोहियुद्दीन ने चौधरी चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल से पहली बार विधायक का चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। इसके बाद काजी उत्तर प्रदेश की राजनीति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दमदार नेता के तौर पर पूरी तरह स्थापित हो गए थे। फिर हरिद्वार की लक्सर विधान सभा सीट से चार बार और रुड़की विधान सभा सीट से एक बार विधायक रहे।
यादों में... 40 साल की सियासत में बेदाग रहने वाले काजी साहब
काजी की हैसियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2000 में उत्तराखंड के गठन के बाद काजी को विधान सभा का प्रोटेम स्पीकर बनाया गया था। वह पूरे 46 दिन तक इस पद पर बने रहे। 2004 के विधान सभा चुनाव में हारने के बाद काजी मोहियुद्दीन ने राजनीतिक सक्रियता कम कर दी थी।
यादों में... 40 साल की सियासत में बेदाग रहने वाले काजी साहब
काजी का संपूर्ण राजनीतिक जीवन पूरी तरह बेदाग रहा। उनके काम करने के अंदाज निराला था, जिसके सभी कायल थे। काजी के बारे में मशहूर था कि जिस काम के लिए वह हां कर देते थे, उसे करा कर ही मानते थे। उनके राजनीतिक अनुभव और स्थानीय लोगों के उनसे लगाव की वजह से उनके पुत्र काजी निजामुद्दीन दो बार विधायक बने।
यादों में... 40 साल की सियासत में बेदाग रहने वाले काजी साहब
काजी मोहियुद्दीन को पढ़ने का काफी शौक था। उन्होंने अपने घर में ही लाइब्रेरी बना रखी थी, जिसमें धर्म व राजनीति संबंधी पुस्तकें भरी पड़ी हैं। काजी को शायरी का भी शौक था। वह अक्सर अपने घर पर महफिलें आयोजित करते थे। काजी के निधन से क्षेत्र के लोगों को बड़ी क्षति पहुंची है।