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PM Modi Badrinath Visit: रम्माण नृत्य से हुआ देश के अंतिम गांव में पीएम स्वागत, ग्रामीणों की इच्छा हुई पूरी
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Fri, 21 Oct 2022 03:03 PM IST
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पीएम के स्वागत के लिए पहुंचे माणा गांव के ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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केदारनाथ धाम में पूजा अर्चना और केदारनाथ रोपवे का शिलान्यास करने के बाद पीएम बदरीनाथ धाम पहुंचे। उन्होंने पूजा कर भगवान बदरीनाथ के दर्शन किए। इसे बाद प्रधानमंत्री मोदी देश के अंतिम गांव माणा के लिए पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने रम्माण नृत्य से उनका स्वागत किया।
प्रधानमंत्री का स्वागत अपने परंपरागत तरीके से करने की ग्रामीणों की इच्छा भी पूरी हुई। प्रधानमंत्री के जनसभा स्थल पर ग्रामीणों को उनका स्वागत चमोली जनपद के प्रसिद्ध रम्माण मुखौटा नृत्य का प्रदर्शन कर किया। यह नृत्य सलूड़ डुंग्रा गांव के ग्रामीणों द्वारा किया गया।
प्रधानमंत्री की अगुवाई में माणा गांव के भोटिया जनजाति की महिला व पुरुषों द्वारा पौणा नृत्य और झुमैलो नृत्य भी किया। यह विविध कार्यक्रमों, पूजा और अनुष्ठानों की एक शृंखला है। इसमें सामूहिक पूजा, देवयात्रा, लोकनाट्य, नृत्य, गायन, मेला आदि विविध रंगी आयोजन होते हैं।
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रम्माण मेला
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
रम्माण शब्द रामायण का अपभ्रंश है। इस नृत्य में भगवान श्री राम के जन्म से लेकर रावण वध तक के आयोजन को मुखौटा नृत्य के साथ आयोजित किया जाता है। कलाकार ढोल दमाऊं की थाप पर मुखौटा नृत्य की प्रस्तुति देते हैं। ढोल वादक जागर गायन भी करता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के संगठन यूनेस्को द्वारा साल 2009 में इस रम्माण को विश्व की सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया था।
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पीएम के स्वागत के लिए पहुंचे माणा गांव के ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
समुद्रतल से 10227 फीट की ऊंचाई पर सरस्वती नदी के किनारे बसे माणा गांव में भोटिया जनजाति के करीब 150 परिवार निवास करते हैं। यह गांव अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ कई अन्य कारणों से भी अपनी अलग पहचान रखता है।
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माणा गांव
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
गांव की महिलाएं ऊन का लव्वा ( ऊन की धोती) और अंगुड़ी (ऊन का बिलाउज) पहनती हैं। यहां की महिलाएं हर वक्त अपने सिर को कपड़े से ढककर रखती हैं। किसी भी सामूहिक आयोजन में महिलाएं और पुरुष समूह में पौणा व झुमेलो नृत्य आयोजित करते हैं।
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माणा गांव
- फोटो : फाइल फोटो
माणा गांव के ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय हाथ और मशीन से ऊनी वस्त्रों का निर्माण करना है। शीतकाल में ग्रामीण भेड़-बकरियों की ऊन निकालकर उनकी कताई करते हैं और तकली या मशीन से उसके तागे बनाते हैं।
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