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...जब देहरादून छोड़कर भाग गए थे गोपालदास नीरज, जानिए पूरी कहानी

Fri, 20 Jul 2018 01:00 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 20 Jul 2018 01:00 AM IST
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renowned hindi poet gopal das neeraj run away from dehradun

कवि एवं गीतकार गोपालदास नीरज एक समय देहरादून छोड़कर भाग गए थे। उस वक्त देश में अंग्रेजों की हुकूमत थी। एक कविता लिखने पर अंग्रेज सरकार ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। आजादी से पहले ही गोपालदास नीरज का देहरादून से जुड़ाव रहा है। कई साल पहले तक भी वह दून आते रहे हैं। बृहस्पतिवार को उनके निधन पर देहरादून में कवियों, साहित्यकारों में शोक की लहर दौड़ गई।


 

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Gopal Das neeraj - फोटो : Amar Ujala

कवि एवं गीतकार गोपालदास नीरज का दून से पुराना नाता रहा है। उन्होंने अपने एक लेख में अपनी कविता, ब्रिटिश हुकूमत की बेरुखी और दून से भागने की वजह बताई थी। उन्होंने वर्ष 1942 में एक कविता लिखी थी, ‘मैं विद्रोही हूं जग में विद्रोह करने आया हूं, बहुत कुछ बदल गया है, चाहे शोर समय का या जोर हवाओं का’। इस कविता को अंग्रेजी हुकूमत ने देश विरोधी माना। उन्होंने माना कि इससे आजादी की चिंगारी भड़क सकती है। इसलिए सरकार ने गोपालदास नीरज के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था। आखिरकार उन्हें देहरादून छोड़कर जाना पड़ा था।

 

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प्रसून जोशी - फोटो : facebook

साहित्यकार डॉ. इंद्रजीत सिंह का कहना है कि गोपालदास नीरज का देहरादून से इतना प्रेम था कि जब भी मौका मिलता, वह यहां जरूर आते थे। भले ही अंग्रेजी हुकूमत की वजह से उन्हें यहां से जाना पड़ा हो, लेकिन आजादी के बाद वह कई मर्तबा देहरादून आए। वर्ष 2009 में शैलेंद्र सम्मान में गोपालदास नीरज बतौर मुख्य अतिथि आए थे। इस समारोह में उन्होंने अपने हाथों से गीतकार प्रसून जोशी को सम्मानित किया था। इससे गोपालदास नीरज को वर्ष 2002 में शैलेंद्र सम्मान रुड़की में दिया गया था। दिल की कलम से जैसे गीत लिखने वाले गोपालदास नीरज ने उस वक्त भी कहा था कि आज उनका शून्य में विलीन होना कभी न पूरी होने वाली क्षति है। राजधानी के साहित्यकारों ने उनके निधन पर शोक जताया।
 

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गोपाल दास नीरज

फिल्मों में साहित्य गीत पर किताब निकालना चाहते थे गोपालदास
डॉ. इंद्रजीत ने बताया कि कुछ दिन पहले उनकी फोन पर गोपालदास नीरज से बात हुई थी। वह चाहते थे कि फिल्मों में साहित्य गीत विषय पर पुस्तक लिखी जाएगी। उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्मों में जो गीत हैं, उनमें कई कविताएं हैं। उन्हें अलग से छांटकर उनकी पुस्तक लिखी जाए। हालांकि उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया।
 

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गोपाल दास नीरज

1995 में डीएवी में बांधा था समां
कवि एवं गीतकार गोपालदास नीरज वर्ष 1995 में डीएवी पीजी कॉलेज आए थे। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय सक्सेना ने बताया कि वह छात्रसंघ समारोह में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में आए थे। उन्होंने अपनी कविताओं से ऐसा समां बांधा था कि देर तक तालियों से उनका स्वागत किया गया था।

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