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UCC विधेयक: शादी और तलाक से लेकर उत्तराधिकार तक बदल जाएंगे नियम, जानें यूसीसी से उत्तराखंड में क्या बदलेगा?
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 06 Feb 2024 02:33 PM IST
सार
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश किया। इस दौरान राज्य विधानसभा में विधायकों ने जय श्री राम के नारे लगाए।
उत्तराखंड जल्द ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला राज्य बन सकता है। चार फरवरी को उत्तराखंड कैबिनेट से यूसीसी विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद उसे आज यानि मंगलवार को विधानसभा में पेश किया गया। अब राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक कानून बन जाएगा।
मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश किया। समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश करने के बाद राज्य विधानसभा में विधायकों ने वंदे मातरम और जय श्री राम के नारे लगाए।
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उत्तराखंड यूसीसी
- फोटो : Amar Ujala
मसौदे में 400 से अधिक धाराएं
समान नागरिक संहिता विधेयक पास होने के बाद कानून बन जाएगा। इसके साथ ही देवभूमि उत्तराखंड देश में यूसीसी लागू करने वाला आजादी के बाद पहला राज्य होगा। सूत्रों के अनुसार, मसौदे में 400 से ज्यादा धाराएं हैं, जिसका लक्ष्य पारंपरिक रीति-रिवाजों से पैदा होने वाली विसंगतियों को दूर करना है।
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UCC
- फोटो : amar ujala
इन समस्याओं के कारण हो रही यूसीसी की वकालत
समान नागरिक संहिता के प्रबल हिमायती एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय के मुताबिक, समान नागरिक संहिता लागू नहीं होने से कई समस्याएं हैं। जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं।
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सीएम पुष्कर सिंह धामी
- फोटो : amar ujala
बहुविवाह पर लगेगी रोक
कुछ कानून में बहुविवाह करने की छूट है। चूंकि हिंदू, ईसाई और पारसी के लिए दूसरा विवाह अपराध है और सात वर्ष की सजा का प्रावधान है। इसलिए कुछ लोग दूसरा विवाह करने के लिए धर्म बदल लेते हैं। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने के बाद बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लगेगी।
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सीएम पुष्कर सिंह धामी
- फोटो : एएनआई
शादी के लिए कानूनी उम्र 21 साल होगी तय
विवाह की न्यूनतम उम्र कहीं तय तो कहीं तय नहीं है। एक धर्म में छोटी उम्र में भी लड़कियों की शादी हो जाती है। वे शारीरिक व मानसिक रूप से परिपक्व नहीं होतीं। जबकि अन्य धर्मों में लड़कियों के 18 और लड़कों के लिए 21 वर्ष की उम्र लागू है। कानून बनने के बाद युवतियों की शादी की कानूनी उम्र 21 साल तय हो जाएगी।
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