ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर हरिद्वार की समस्त ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने ट्रकों के पहिये जाम रखे। इससे जनपद की सैकड़ों कंपनियों को सामान डिस्पैच न होने से करोड़ों का नुकसान हुआ। ट्रक मालिकों को भी नुकसान उठा पड़ा है। यूनियन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों के पूरा होने तक यह हड़ताल जारी रहेगी।
यहां एक दिन में ही करोड़ों के कारोबार पर भारी पड़ी ट्रांसपोर्ट यूनियनों की हड़ताल
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विभिन्न मांगों पर कोई कार्रवाई न होने पर ट्रांसपोर्ट यूनियन ने हड़ताल रखी। हड़ताल में जनपद के करीब 15 हजार ट्रकों के पहिये जाम रहे। ट्रक मालिकों ने बहादराबाद से सिडकुल कार्यालय तक रैली निकाली और प्रदर्शन किया। इस मौके पर सिडकुल हरिद्वार ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने कहा कि विभिन्न मांगों को लेकर जनपद की ट्रक ऑपरेटरों की समस्त यूनियन अनिश्चितकालीन हड़ताल करने को विवश हुईं। हड़ताल से जहां उनका भी आर्थिक नुकसान हुआ तो औद्योगिक इकाइयों में सामान की आपूर्ति न होने से नुकसान हुआ है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो शनिवार को भी हड़ताल रहेगी। यदि फिर भी कोई मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो हड़ताल आगे भी बढ़ती रहेगी। इस दौरान सतनाम सिंह भाटिया, उम्मेद सिंह, रामनरायण शर्मा, मनोज, राजेश जम्दग्नि, सुधीर जोशी, सुरेंद्र कौशिक, सतनाम सिह भाटिया, महता ट्रांसपोर्ट से रत्न पाल सिंह चौहान, लज्जेराम शर्मा, विजय भारद्वाज, उम्मेद सिंह, मनोज, भगवान सिंह, हांडा शर्मा, श्रवण शर्मा, प्रदीप, विनोद चौधरी, राजेश शर्मा, नरेंद्र चौधरी, शमशेर, नवीन कौशिक, महेंद्र, ऑल ओवर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष के कुंवर राव अखलाक, शाहजेब खान, कमल शर्मा, मुमताज अहमद, रिफाकत अली, वीर सिंह, खालिद अहमद आदि सैकडों ट्रांसपोर्टर उपस्थित थे।
स्थानीय ऑटो चालकों ने भी आज पुलिस के उत्पीड़न और ऑटो की समयावधि घटाने के विरोध में हड़ताल रखी। इस हड़ताल के कारण हजारों ऑटो शहर में नहीं चले। कई जगह इस वजह से भारी परेशानी हुई। कई जगह स्कूली बच्चे भी ऑटो नहीं आने के कारण परेशान रहे।
ट्रांसपोर्टरों की मुख्य मांगे
देश की ऑपरेटरों की मुख्य मांगों में डीजल की कीमतों में कमी, त्रैमासिक संशोधन और राष्ट्रीय स्तर पर समान मूल्य, तृतीय पक्ष बीमा प्रीमियम में जीएसटी से छूट, एजेंट कमीशन समाप्त करने, वर्ष में बढ़ाया प्रीमियम वापस लेने, आयकर अधिनियम की धारा 44-ई को तर्कसंगत बनाने, टीडीएस को समाप्त और दर में कमी करने, कॉमर्शियल वाहनों पर टोल टैक्स समाप्त व कम करने, अनुबंध समय समाप्त होने पर टोल बंद करने, नेशनल हाईवे अथारिटी की अनुबंध की शर्तें लागू करना शामिल हैं।