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चमोली आपदाः अवैज्ञानिक तरीके से पहाड़ियां काटने से बिगड़ रहा संतुलन, आ रही भारी बाढ़

Wed, 17 Feb 2021 10:38 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal महेंद्र जंगपांगी, अमर उजाला, थल (पिथौरागढ़)
महेंद्र जंगपांगी, अमर उजाला, थल (पिथौरागढ़) Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 17 Feb 2021 10:38 AM IST
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तपोवन सुरंग के पास मशीनें - फोटो : अमर उजाला

अवैज्ञानिक तरीके से पहाड़ियों को काटने से संतुलन गड़बड़ा रहा है। इससे गंभीर भूस्खलन और भारी बाढ़ आ रही है। यह कहना है भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के सेवानिवृत्त अपर महानिदेशक त्रिभुवन सिंह पांगती का। संवाद न्यूज एजेंसी से हुई बातचीत में उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं पर गहरी चिंता जताई और एक उच्च समिति बनाने की सिफारिश की जो प्रदेश में सुनियोजित विकास का वास्तविक आकलन कर सके।

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तपोवन में बैराज साइट पर शवों को ढूंढती टीम - फोटो : अमर उजाला

चमोली के ऋषिगंगा में बाढ़ के कारण तबाह हुई बिजली परियोजना की शुरुआत में दो वर्षों तक काम कर चुके पूर्व अपर निदेशक त्रिभुवन का कहना है कि विकास के लिए हिमालय की संवेदनशीलता को नजरअंदाज करना घातक होगा। उन्होंने कहा कि बिजली परियोजनाओं का निर्माण कर रही निजी कंपनियों को पहाड़ी इलाके के भूभाग की स्थिति से संबंधित जानकारी नहीं है।

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नदी में मलबा - फोटो : अमर उजाला

सभी परियोजनाएं उत्तराखंड राज्य में पूरी तरह से विफल हो रही हैं। इसकी गंभीरता को देखते हुए किसी सरकारी विभाग या हिमालयन क्षेत्रों में कार्य करने की विशेषज्ञता प्राप्त अन्य तकनीकी एजेंसियों से भूगर्भीय, जिओ हेजर्ड (जोखिम, ग्लेशियोलॉजिकल और भूभाग का विस्तृत अध्ययन कराना जरूरी है।

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सुरंग के अंदर रास्ता बनाते जवान - फोटो : ANI

हिमालयी क्षेत्रों के सभी बुनियादी ढांचे और संचार परियोजनाओं के लिए सभी तकनीकी समीक्षा और सलाह प्रदान के लिए प्रख्यात विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति स्थापित करने की जरूरत है, जो हिमालयी क्षेत्रों की सभी परियोजनाओं के सुनियोजित विकास का वास्तविक आकलन कर सके।

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इसी जगह पर था ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट - फोटो : अमर उजाला

पिछले दिनों चमोली में नीती घाटी में आई आपदा पर वाडिया इंस्टीट्यूट समेत कई संस्थानों के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीमें मंथन करेंगी। इसके बाद इस तरह की आपदा से निपटने के लिए जरूरी कवायद की जाएगी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने देश के तमाम संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ बैठक कर आपदा से जुड़े तमाम पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने वैज्ञानिकों की दो संयुक्त टीमें गठित की हैं। ये टीमें 60 दिनों में रिपोर्ट सौंपेंगी।

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