उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव कांग्रेस की लुटिया डूब गई है। पहले 2014 लोकसभा चुनाव, फिर 2017 विधानसभा चुनाव और अब 2019 लोकसभा चनाव में मिली प्रचंड हार के बाद कांग्रेस चारों खाने चित्त है। इन पराजय के बीच थराली का उपचुनाव और नगर निकाय के सामान्य चुनाव भी हैं। हार का सिलसिला तोड़ने का ख्वाब हकीकत में नहीं बदल पाया। कांग्रेस के पास हरीश रावत, प्रीतम सिंह, प्रदीप टम्टा जैसे बेहतर और अनुभवी चेहरे थे।
लोकसभा चुनाव परिणाम 2019: उत्तराखंड में कांग्रेस पड़ी कमजोर, तीसरी बार करारी हार के पीछे ये वजह
मुद्दों की भरमार थी, लेकिन उन्हें भुनाने के लिए संगठन की ताकत नहीं थी। चुनाव प्रबंधन जैसी चीज के दर्शन नहीं थे। पांचों सीटों पर प्रत्याशियों से जितना हो सका, उन्होंने चुनाव अपने बूते लड़ा। चुनाव का प्रबंधन बिखरा बिखरा और असमान था। पांचों लोकसभा सीटों पर शर्मनाक पराजय के बाद कांग्रेस के पास बोलने सुनने के लिए कुछ नहीं है। कांग्रेस हार से सीखकर आगे बढे़गी या नहीं, ये अलग बात है, लेकिन गुटबाजी का नया दौर आने वाले दिनों में शुरू होना तय है।
कांग्रेस ने प्रत्याशियों के चयन में देर जरूर की, लेकिन अच्छे चेहरे मैदान में उतारे। नैनीताल में अजय भट्ट के मुकाबले कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने चुनाव लड़ा, तो अल्मोड़ा में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा के सामने कांग्रेस राज्यसभा के सदस्य प्रदीप टम्टा को लेकर आई। हालांकि टम्टा का राज्यसभा का कार्यकाल अभी शेष है। टिहरी सीट पर महारानी माला राज्य लक्ष्मी शाह के मुकाबले पार्टी ने खुद प्रदेश अध्यक्ष और पांच बार के विधायक प्रीतम सिंह को उम्मीदवार बनाया था।
पौड़ी में एकदम नए चेहरे पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी के पुत्र मनीष खंडूड़ी और हरिद्वार में पूर्व विधायक अंबरीश कुमार को कांग्रेस ने टिकट दिया था। इन स्थितियों के बीच, प्रत्याशियों को संगठन का साथ नहीं मिला। भाजपा की तुलना में कांग्रेस के स्टार प्रचारक भी उत्तराखंड में कम आए। लोकसभा के इस चुनाव में पार्टी की गुटबाजी ने भी काम बिगाड़ा है। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह चुनाव लडे़, तो नैनीताल लोकसभा क्षेत्र के कई कार्यकर्ता वहां से सीधे टिहरी पहुंच गए।
इसी तरह, हरीश रावत नैनीताल पहुंचे, तो टिहरी और हरिद्वार संसदीय क्षेत्रों के उनके समर्थक कार्यकर्ताओं ने कुमाऊं में डेरा डाल दिया। पौड़ी, अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्रों में भी कार्यकर्ताओं और नेताओं की शिफ्टिंग गुटों के हिसाब से इधर से उधर होती रही। स्टार प्रचारकों के कार्यक्रम आयोजित कराने तक में गुटबाजी की अहम भूमिका रही। हरीश रावत समर्थकों की शिकायत रहीं कि नैनीताल लोकसभा क्षेत्र में जानबूझकर किसी स्टार प्रचारक को नहीं भेजा गया। कांग्रेस की चुनावी तैयारियां पहले दिन से ही पिछड़ी दिखाई दीं।