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तनाव से मुक्ति: रानीखेत में जंगल के बीच बना देश का पहला हीलिंग सेंटर, प्रकृति के बीच ऐसे मिलेगा सुकून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)
Published by: अलका त्यागी
Updated Sun, 07 Mar 2021 09:51 PM IST
किसी भी तरह के तनाव से ग्रसित लोगों के लिए सुकून की खबर है। उत्तराखंड के रानीखेत में देश का पहला हीलिंग सेंटर खोला गया है। यह सेंटर उत्तराखंड वन अनुसंधान की तरफ से कालिका रिसर्च सेंटर के पीछे जंगल में बनाया गया है। यह जापानी तकनीक पर आधारित सेंटर है। यहां तमाम तरह के तनाव से जूझ रहे लोग प्रकृति के बीच रहकर तनाव से मुक्ति पा सकते हैं।
रविवार को मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी की मौजूदगी में हीलिंग सेंटर का उद्घाटन हुआ। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज भी भाग दौड़ की जिंदगी में लोग किसी न किसी तरह के तनाव में रहते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य तनावग्रस्त लोगों को तनाव से बाहर निकालना है। लोग जंगल के अंदर जाकर ध्यान लगा सकते हैं। इस सेंटर के लिए पांच हैक्टेयर वन क्षेत्र को विकसित किया गया है। यहां दो ट्री हाउस, जंगल वॉक के लिए पगदंडी विकसित की गई है।
वह प्रकृति के नजदीक बैठकर तनाव मुक्त हो सकते हैं। इस तरह के और सेंटर प्रदेश में अन्य जगहों पर भी विकसित किए जाएंगे। वनों का महत्व मानव जीवन में कहीं अधिक है, यह देश का पहला हीलिंग सेंटर है। इसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। इस दौरान लोक चेतना मंच के निदेशक, उत्तराखंड वन अनुसंधान के सलाहकार जोगेंद्र बिष्ट भी मौजूद रहे।
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देश का पहला हीलिंग सेंटर
- फोटो : अमर उजाला
जोगेंद्र बिष्ट ने इसका कहा कि रानीखेत जैव विविधता के लिए समृद्ध क्षेत्र है। ऐसे में इस तरह के प्रयास सराहनीय हैं। इससे लोगों में जंगलों के प्रति लगाव भी बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड का यह पहला प्रयोग है। इसे पूरी तरह से जापानी तकनीक पर विकसित किया गया है। यह सघन वन क्षेत्र 29 प्रकार की चीढ़ की प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है। इससे पेड़ पौधों का संरक्षण, जड़ी बूटियों का संरक्षण भी होगा।
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- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि हीलिंग की यह प्रक्रिया जापान में काफी प्रसिद्ध हुई है। यह सेंटर न केवल लोगों को सुकून देगा बल्कि यह पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित करेगा। रानीखेत के आसपास और क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं, इससे लोग वनों के महत्व को समझेंगे। यहां वन क्षेत्राधिकारी आरपी जोशी, मंच से जुड़े पंकज चौहान, गिरीश पांडे, आनंद सिंह सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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चीड़ के जंगल के नुकसान तो बहुत गिनाए जाते हैं लेकिन इस बार वन अनुसंधान केंद्र देश के पहले हीलिंग जंगल के बहाने चीड़ के पेड़ों के मानव स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव की खासीयत का उपयोग कर रहा है। चीड़ के पेड़ों की इसी खासीयत को देखते हुए भवाली में क्षय रोग के उपचार के लिए सेनेटोरियम भी बनाया गया था। चीड़ के पेड़ों से निकलने वाले तैलीय कंपाउंड पेड़ को कई तरह के खतरनाक जीवाणुओं से बचाते हैं।
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यही वजह है कि चीड़ के जंगल में एक अलग तरह की खुशबू हमेशा बनी रहती है। यह कंपाउंड मनुष्यों में श्वेत रक्त कणिकाओं की वृृद्धि दर को बढ़ाते हैं। इसके साथ ही अन्य प्रभाव के कारण मनुष्यों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। इसके साथ ही इस कंपाउंड से तनाव कम होता है।
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