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पूर्णागिरि जनशताब्दी के उल्टा दौड़ने का मामले में बड़ा खुलासा, ट्रैक पर हैं ढलान, ट्रेनों को बांधते हैं जंजीरों से
राजेश देउपा, अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 19 Mar 2021 11:06 AM IST
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purnagiri jan shatabdi express
- फोटो : अमर उजाला
पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस टनकपुर से उल्टी दिशा में 24 किलोमीटर क्यों दौड़ी इसका पता तो जांच कमेटी की रिपोर्ट से ही पता चलेगा। प्रारंभिक जांच में लोको पायलट, सहायक पायलट और गार्ड को दोषी मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। तीनों के शराब के नशे में होने का शक है, जिसके लिए ब्लड सैंपल जांच के लिए गए हैं।
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उल्टी दौड़ने लगी ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
रेलवे के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ट्रैक पर ढलान भी बड़ी समस्या है। ढलान की वजह से टनकपुर स्टेशन पर ट्रेनों के पहुंचने के बाद यार्ड में खड़े रैक और बंद इंजनों को लोहे की जंजीरों से बांधकर रखा जाता है।
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उल्टी दौड़ने लगी ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
टनकपुर से बनबसा तक रेल लाइन में काफी ढलान है, लेकिन तकनीकी दस्तावेज में ढलान का जिक्र तक नहीं है। बुधवार शाम चार बजे दिल्ली से टनकपुर आ रही पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस स्टेशन से पहले ही बोम सिग्नल के पास एक गोवंश से टकराकर कुछ पल बाद ही उल्टी दिशा में दौड़ पड़ी थी। ट्रेन को काफी मशक्कत के बाद 24 किलोमीटर दूर खटीमा से पहले किसी तरह रोकने में सफलता मिल पाई थी।
उल्टी दौड़ने लगी ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जेए ग्रेड के तीन अधिकारियों की कमेटी गठित की गई है। रेलवे सूत्रों की माने तो टनकपुर स्टेशन से होम सिग्नल तक लाइन में 100 फीट पर एक ढलान है, जबकि होम सिग्नल से आगे ढलान का यह ग्राफ और ज्यादा है, मगर सोचने वाली बात यह है कि लाइन में ढलान होने के बाद भी रेलवे के तकनीकी दस्तावेजों में इस ढलान का जिक्र तक नहीं है। अगर ढलान का जिक्र होता तो अधिकारी इस दिशा में काम जरूर करते।
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उल्टी दौड़ने लगी ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
दस्तावेजों में नहीं है ढलान का जिक्र
रेल सूत्रों के मुताबिक टनकपुर स्टेशन के होम सिगनल तक एक हजार फिट में एक फिट का ढलान है। जबकि होम सिगनल के बाहर इससे ज्यादा ढलान है। इस ढलान का जिक्र रेलवे के दस्तावेजों में नहीं है। इसी वजह से टनकपुर स्टेशन पर ट्रेन खड़ी होने पर जंजीर से बंधाने के संसाधन नहीं हैं। जबकि नियमानुसार ढलान वाले स्टेशनों पर ट्रेन को जंजीर से बंधाने की सुविधा होनी चाहिए।
रेल सूत्रों के मुताबिक टनकपुर स्टेशन के होम सिगनल तक एक हजार फिट में एक फिट का ढलान है। जबकि होम सिगनल के बाहर इससे ज्यादा ढलान है। इस ढलान का जिक्र रेलवे के दस्तावेजों में नहीं है। इसी वजह से टनकपुर स्टेशन पर ट्रेन खड़ी होने पर जंजीर से बंधाने के संसाधन नहीं हैं। जबकि नियमानुसार ढलान वाले स्टेशनों पर ट्रेन को जंजीर से बंधाने की सुविधा होनी चाहिए।