राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने का एलान कर दिया। हालांकि इसके कयास राजनीतिक गलियारों में पहले से लगाए जा रहे थे, इंतजार था तो बस दिन और वक्त का और आज वो आ गया। राघव अकेल पार्टी छोड़कर नहीं गए बल्कि अपने साथ सात सांसदों को भी भाजपा में ले गए। उन्हेंने कहा कि दो तिहाई सांसद भाजपा में शामिल होंगे। इस घटनाक्रम पर आप ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह ऑपरेशन लोटस का घिनौना खेल है। संजय सिंह ने कहा कि ये जो सात राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं, उनके नाम पंजाब के लोगों को याद रखना चाहिए और इन्हें आने वाले चुनाव में सबक सीखाने का काम करें। आइए जानते हैं कि इस आप से जुड़े बड़े नाम कब और क्यों अलग हुए।
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आप के पूर्व सहयोगी प्रशांत भूषण
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प्रशांत भूषण
प्रशांत भूषण भी आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में से एक थे लेकिन उन्होंने भी आम आदमी पार्टी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए थे और कहा था कि पार्टी एक व्यक्ति केंद्रित है। प्रशांत भूषण ने कहा है कि पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र तो है, लेकिन स्वराज नहीं है। पार्टी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाने के साथ पार्टी फंड की जांच के लिए एथिक्स कमेटी की मांग भी की थी। प्रशांत भूषण के पिता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने आप की स्थापना के समय एक करोड़ की राशि चंदे के रूप में दी थी। हालांकि जल्द ही उनका पार्टी से मोहभंग हो गया था और वो आम आदमी पार्टी से अलग हो गए थे।
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शाजिया इल्मी और अरविंद केजरीवाल
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शाजिया इल्मी
शाजिया इल्मी ने आप में आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। शाजिया ने 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़ी। साल 2014 में वो आप के टिकट पर गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ी थीं, लेकिन बीजेपी प्रत्याशी वीके सिंह से शिकस्त मिली। लेकिन इसके बाद उन्होंने आप छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया।
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अरविंद केजरीवाल और योगेंद्र यादव
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योगेंद्र यादव
वहीं अगर योगेंद्र यादव की बात की जाए तो उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी का जन्म भ्रष्टाचार के खिलाफ चले एक बड़े जनांदोलन के बाद हुआ। जनता ने अन्य राजनीतिक पार्टियों की तुलना में आप में एक विकल्प देखा। आप को जो भी सफलता मिली है, वह परंपरागत राजनीति के खिलाफ जनता के मन में बैठे असंतोष के कारण थी। लेकिन अब पार्टी की कार्य करने का तरीका अन्य पार्टियों की तरह ही हो गया है। इसके बाद योगेंद्र यादव ने अपनी एक अलग राजनीतिक पार्टी स्वराज अभियान बनाई।
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कुमार विश्वास।
- फोटो : अमर उजाला
कुमार विश्वास
2012 में अन्ना आंदोलन से जुड़ने और आम आदमी पार्टी के साथ सक्रिय राजनीतिक की शुरुआत करने से पहले कुमार विश्वास की राजनीति में एंट्री की बात करें तो वह किसी खास योजना के तहत राजनीति में नहीं आए थे। पहले वह लोकपाल को लेकर किए गए अन्ना आंदोलन में जुड़े। इसमें अरविंद केजरीवाल के साथ वह बड़े नामों में शामिल थे। अन्ना आंदोलन के कुछ समय बाद 2012 में जब अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के गठन का फैसला किया तो वह उनके साथ नजर आए और आम आदमी पार्टी के जरिये राजनीति में आ गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव भी लड़ा। कुमार विश्वास से जब यह पूछा गया कि क्या आपकी राजनीति पर विराम लग गया है, तो उन्होंने कहा कि नहीं... मैं झूठ नहीं कह सकता कि बच्चों की कसम खाऊं की फिर कभी नहीं जाऊंगा। उन्होंने कहा कि मैं पार्टी में गलत कामों का विरोध करता था, इसलिए मुझे किनारे किया गया।