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गाजियाबाद के गौड़ ग्रीन एवेन्यू में आग: दमकल का सिस्टम फेल, देरी से नुकसान में इजाफा; फिर भी लोग बने ढाल
राजू मलिक, गाजियाबाद
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 30 Apr 2026 07:01 AM IST
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सार
सोसायटी में आग लगते ही दमकल विभाग को सूचना दे दी गई थी, लेकिन हाइड्रोलिक सिस्टम वाली गाड़ी को पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे लग गए। यह देरी राहत-बचाव के लिहाज से भारी पड़ी। इसी ने आग को फैलने का मौका दिया और नुकसान कई गुना बढ़ गया।
फ्लैट में लगी भीषण आग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में लगी आग ने एक बार फिर अग्निशमन विभाग की तैयारियों की पोल खोल दी। सोसायटी में आग लगते ही दमकल विभाग को सूचना दे दी गई थी, लेकिन हाइड्रोलिक सिस्टम वाली गाड़ी को पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे लग गए। यह देरी राहत-बचाव के लिहाज से भारी पड़ी। इसी ने आग को फैलने का मौका दिया और नुकसान कई गुना बढ़ गया।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुबह करीब 8:31 बजे कमल पालीवाल के फ्लैट में भड़की आग कुछ ही मिनटों में विकराल हो गई। लपटें दूर-दूर तक दिखाई देने लगीं। हैरानी की बात यह रही कि सोसायटी के पीछे अभय खंड पुलिस चौकी है। 800 मीटर दूरी पर ट्रैफिक बूथ बना है। दो किलोमीटर पर एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव का कार्यालय है और इंदिरापुरम थाना है।
दमकल विभाग का कार्यालय भी घटनास्थल से मात्र दो किलोमीटर दूर है। इसके बावजूद शुरुआती अलर्ट सिस्टम पूरी तरह नाकाम रहा। स्थिति यह रही कि सोसायटी के लोगों को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। पड़ोसी टॉवर से सबमर्सिबल पंप, पाइप और बाल्टियों के सहारे आग बुझाने की कोशिशें शुरू की गईं।
अग्निशमन विभाग की टीम 8:57 बजे मौके पर पहुंची, वो भी आधी-अधूरी तैयारी के साथ।सोसायटी में रहने वाले रेनू अग्रवाल, श्रेया, नीरज, अनुमान आदि ने बताया कि दमकल की टीम करीब नौ बजे सोसायटी में दाखिल हुई। इसके बाद टीम ने पांच हजार और 10 हजार लीटर वाले पानी के टैंकर पर लगे वॉटर मॉनिटर से करीब 70 मीटर दूर से पानी की बौछार फेंकी।
वाटर मॉनिटर लंबाई तक पानी फेंकने में सहायक होता है, ऊंचाई पर नहीं। ऐसे में वह फेल साबित हुआ। करीब साढ़े नौ बजे हाइड्रोलिक सिस्टम मंगाया गया, जिसकी क्षमता मात्र 42 मीटर तक ही पानी की बौछार करने की है। उसके बाद एक अन्य हाइड्रोलिक सिस्टम गौतमबुद्धनगर से मंगाया गया। इन दोनों ने मिलकर 9वीं से 12वीं मंजिल तक पानी की बौछार की, लेकिन तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका था।
इन्हें सुरक्षित निकाला
सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि आग की सूचना के बाद मौके से अय्यूब (82), सुधांशु शर्मा (88), रुचि शर्मा (57), कुसुम शर्मा (68), अनूप कुमार (55), अनुराग शर्मा (53), वीवा अग्रवाल (44), कमल अरोरा (49), आयुष (19) और कुसुम (45) शामिल हैं।
करोड़ों के फ्लैट पर आग से बचाव के लिए इंतजाम नहीं
साहिबाबाद। ऊंची-ऊंची इमारतें, महंगे फ्लैट और हर महीने हजारों रुपये का मेंटेनेंस। इसके बावजूद जनपद की बहुमंजिला इमारतों और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में आग से सुरक्षा के हालात चौंकाने वाले हैं। यहां रहने वाले पांच लाख से ज्यादा लोगों की जान जोखिम में है। स्थिति यह है कि अगर कहीं एक चिंगारी भी उठे तो उसे काबू करने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
यह बदइंतजामी सिर्फ पुराने अपार्टमेंट या बिल्डर फ्लोर तक सीमित नहीं, बल्कि उन हाईराइज सोसाइटियों तक फैली है, जहां एक-एक फ्लैट की कीमत एक से डेढ़ करोड़ रुपये है। इसके अलावा भी निवासी हर महीने दो से पांच हजार रुपये मेंटेनेंस के नाम पर चुका रहे हैं। बदले में मिल रहा है अधूरा सुरक्षा ढांचा। हाल ही में अग्निशमन विभाग के सर्वे ने इस सच्चाई पर मुहर लगा दी। नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच हुए निरीक्षण में करीब 50 बहुमंजिला इमारतें और 30 से ज्यादा प्रतिष्ठान ऐसे मिले, जहां फायर सेफ्टी में गंभीर खामियां थीं। ब्यूरो
एनओसी भी कागजों में
नियमों के मुताबिक, हर सोसायटी को पांच साल में अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना और उसका नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। जांच में सामने आया कि कई सोसायटियों के पास या तो एनओसी है ही नहीं या फिर कई साल से रिन्यू नहीं कराया गया। जिले में 500 से अधिक आवासीय परिसर हैं, जिनका निरीक्षण जारी है।
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स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुबह करीब 8:31 बजे कमल पालीवाल के फ्लैट में भड़की आग कुछ ही मिनटों में विकराल हो गई। लपटें दूर-दूर तक दिखाई देने लगीं। हैरानी की बात यह रही कि सोसायटी के पीछे अभय खंड पुलिस चौकी है। 800 मीटर दूरी पर ट्रैफिक बूथ बना है। दो किलोमीटर पर एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव का कार्यालय है और इंदिरापुरम थाना है।
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दमकल विभाग का कार्यालय भी घटनास्थल से मात्र दो किलोमीटर दूर है। इसके बावजूद शुरुआती अलर्ट सिस्टम पूरी तरह नाकाम रहा। स्थिति यह रही कि सोसायटी के लोगों को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। पड़ोसी टॉवर से सबमर्सिबल पंप, पाइप और बाल्टियों के सहारे आग बुझाने की कोशिशें शुरू की गईं।
अग्निशमन विभाग की टीम 8:57 बजे मौके पर पहुंची, वो भी आधी-अधूरी तैयारी के साथ।सोसायटी में रहने वाले रेनू अग्रवाल, श्रेया, नीरज, अनुमान आदि ने बताया कि दमकल की टीम करीब नौ बजे सोसायटी में दाखिल हुई। इसके बाद टीम ने पांच हजार और 10 हजार लीटर वाले पानी के टैंकर पर लगे वॉटर मॉनिटर से करीब 70 मीटर दूर से पानी की बौछार फेंकी।
वाटर मॉनिटर लंबाई तक पानी फेंकने में सहायक होता है, ऊंचाई पर नहीं। ऐसे में वह फेल साबित हुआ। करीब साढ़े नौ बजे हाइड्रोलिक सिस्टम मंगाया गया, जिसकी क्षमता मात्र 42 मीटर तक ही पानी की बौछार करने की है। उसके बाद एक अन्य हाइड्रोलिक सिस्टम गौतमबुद्धनगर से मंगाया गया। इन दोनों ने मिलकर 9वीं से 12वीं मंजिल तक पानी की बौछार की, लेकिन तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका था।
इन्हें सुरक्षित निकाला
सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि आग की सूचना के बाद मौके से अय्यूब (82), सुधांशु शर्मा (88), रुचि शर्मा (57), कुसुम शर्मा (68), अनूप कुमार (55), अनुराग शर्मा (53), वीवा अग्रवाल (44), कमल अरोरा (49), आयुष (19) और कुसुम (45) शामिल हैं।
करोड़ों के फ्लैट पर आग से बचाव के लिए इंतजाम नहीं
साहिबाबाद। ऊंची-ऊंची इमारतें, महंगे फ्लैट और हर महीने हजारों रुपये का मेंटेनेंस। इसके बावजूद जनपद की बहुमंजिला इमारतों और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में आग से सुरक्षा के हालात चौंकाने वाले हैं। यहां रहने वाले पांच लाख से ज्यादा लोगों की जान जोखिम में है। स्थिति यह है कि अगर कहीं एक चिंगारी भी उठे तो उसे काबू करने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
यह बदइंतजामी सिर्फ पुराने अपार्टमेंट या बिल्डर फ्लोर तक सीमित नहीं, बल्कि उन हाईराइज सोसाइटियों तक फैली है, जहां एक-एक फ्लैट की कीमत एक से डेढ़ करोड़ रुपये है। इसके अलावा भी निवासी हर महीने दो से पांच हजार रुपये मेंटेनेंस के नाम पर चुका रहे हैं। बदले में मिल रहा है अधूरा सुरक्षा ढांचा। हाल ही में अग्निशमन विभाग के सर्वे ने इस सच्चाई पर मुहर लगा दी। नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच हुए निरीक्षण में करीब 50 बहुमंजिला इमारतें और 30 से ज्यादा प्रतिष्ठान ऐसे मिले, जहां फायर सेफ्टी में गंभीर खामियां थीं। ब्यूरो
एनओसी भी कागजों में
नियमों के मुताबिक, हर सोसायटी को पांच साल में अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना और उसका नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। जांच में सामने आया कि कई सोसायटियों के पास या तो एनओसी है ही नहीं या फिर कई साल से रिन्यू नहीं कराया गया। जिले में 500 से अधिक आवासीय परिसर हैं, जिनका निरीक्षण जारी है।
