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दिल्ली अग्निकांड: रियाजुद्दीन ने पेश की इंसानियत की मिसाल, बेटे के साथ मिलकर बचाई 20 लोगों की जान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विकास कुमार
Updated Thu, 04 Jun 2026 10:26 PM IST
सार
होटल में आग लगने की सूचना मिलते ही रियाजुद्दीन मंसूरी अपने कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने होटल के बाहर जमीन पर दर्जनों रजाइयां और गद्दे बिछाकर अस्थायी सुरक्षा कवच तैयार किया। इससे इमारत में फंसे लोगों को कूदकर सुरक्षित बाहर निकलने में मदद मिली।
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रियाजुद्दीन ने पेश की इंसानियत की मिसाल, बेटे के साथ मिलकर संभाला मोर्चा
- फोटो : अमर उजाला
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मालवीय नगर स्थित फ्लरिश स्टे होटल में बुधवार को आग लगने के बाद जब चारों ओर धुआं और लपटें फैल गईं, तब सामने दुकान चलाने वाले एक गद्दा कारोबारी रियाजुद्दीन ने पल भर में फैसला लेते हुए करीब दो लाख रुपये के अपने गद्दे बिछा दिए, जिससे कई लोगों की जान बच सकी। उन्होंने कहा कि जान से बढ़कर कुछ नहीं होता। पैसा फिर आ जाएगा, लेकिन अगर किसी की जान चली जाती तो उसकी भरपाई नहीं हो सकती थी।
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जान बचाने के लिए कूदते लोग
- फोटो : अमर उजाला
लोग खिड़कियों से मांग रहे थे मदद
होटल में आग लगने की सूचना मिलते ही रियाजुद्दीन मंसूरी अपने कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने होटल के बाहर जमीन पर दर्जनों रजाइयां और गद्दे बिछाकर अस्थायी सुरक्षा कवच तैयार किया। इससे इमारत में फंसे लोगों को कूदकर सुरक्षित बाहर निकलने में मदद मिली। रियाजुद्दीन के अनुसार, सुबह अचानक शोर सुनाई देने पर बाहर निकलकर देखा तो होटल की ऊपरी मंजिलों से धुआं निकल रहा था। लोग खिड़कियों पर आकर मदद की गुहार लगा रहे थे।
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जान बचाने के लिए कूदते लोग
- फोटो : अमर उजाला
रियाजुद्दीन को हुआ दो लाख रुपये का नुकसान
उन्होंने बताया कि उस समय उनके मन में सिर्फ एक ही बात थी किसी भी तरह लोगों को बचाया जाए। रियाजुद्दीन के अनुसार, मैंने जब लोगों को इमारत से कूदते देखा, तो मैंने अपनी दुकान से गद्दे सड़क पर बिछाकर करीब 20 लोगों की जान बचाई। उनके अनुसार, करीब आठ लोगों ने सीधे गद्दों पर छलांग लगाई और गंभीर चोट से बच गए। इसके अलावा कई अन्य लोगों को नीचे उतारने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में उन्होंने मदद की। इस साहसिक कदम से रियाजुद्दीन को करीब दो लाख रुपये का नुकसान हुआ। कई गद्दे धुएं और आग की चिंगारियों से खराब हो गए। रजाइयों के कवर भी बेकार हो गए। इसके बावजूद उनके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं है। रियाजुद्दीन का परिवार करीब 40 साल से हौजरानी में गद्दों की दुकान चला रहा है।
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घायल को लेकर जाती बचाव टीम
- फोटो : पीटीआई
मुझे और मेरे बेटे अरमान को भी चोटें आईं
आग लगने के तुरंत बाद हमने सबसे पहले गद्दे और रजाइयां बिछाईं। बचाव कार्य के दौरान मुझे और मेरे बेटे अरमान को भी चोटें आईं। मैंने जब लोगों को इमारत से कूदते देखा, तो मैंने अपनी दुकान से गद्दे सड़क पर बिछाकर करीब 20 लोगों की जान बचाई। -रियाजुद्दीन मंसूरी
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