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Burari Case: याद कर आज भी सिहर उठते हैं लोग, एक आत्मा...रात में अनुष्ठान और 11 मौतें
Fri, 01 Jul 2022 10:49 AM IST
शाहरुख खान
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 01 Jul 2022 10:49 AM IST
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burari death case
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली के बुराड़ी सामूहिक आत्महत्या कांड को आज पूरे चार साल हो गए। एक जुलाई वर्ष 2018 की सुबह देश ही नहीं बल्कि विदेशी मीडिया के लिए उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी इलाका चर्चाओं का विषय बन गया था। आज भी इस घटना को याद कर स्थानीय लोग सिहर उठते हैं। वहां एक साथ घर के 10 लोग फंदे से लटके थे, जबकि घर की सबसे बुजुर्ग महिला का शव एक कमरे से बरामद हुआ था। एक साथ इतने लोगों की आत्महत्या को देखकर जांच दल के भी रोंगटे खड़े हो गए थे। मौके पर हालात देखकर पुलिस ने शुरुआत में इस संबंध में हत्या का मामला दर्ज कर जांच अपराध शाखा से करवाई। जैसे-जैसे जांच बढ़ी तो पता चला कि बुराड़ी के चूंडावत परिवार ने एक अनुष्ठान के चक्कर में घर के 11 लोगों की जान दांव पर लगा दी, जिसके बाद सभी की मौत हो गई। दो भाइयों को लगता था कि पिता की आत्मा उन्हें अनुष्ठान के निर्देश देती है। ताकि घर में खुशहाली आ जाए।
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मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी (पोस्टमार्टम) करवाने के बाद पता चला कि कोई भी आत्महत्या नहीं करना चाहता था। जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में केस की क्लोजर रिपोर्ट लगाकर इसको बंद करवा दिया था। इतने बड़े हादसे को नेटफ्लिक्स ने भी भुनाया। उसने घटना पर एक डॉक्योमेंट्री बना दी, जिसको खूब देखा गया।
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बुराड़ी के संत नगर इलाके में चूंडावत परिवार दो मंजिला मकान में रहता था। इनके परिवार में बुजुर्ग नारायणी देवी (77), इनके दो बेटे भावनेश भाटिया (50), ललित भाटिया (45), भावनेश की पत्नी सविता (48), ललित की पत्नी टीना (42), नारायणी देवी की विधवा बेटी प्रतिभा (57) और तीनों भाई-बहनों के बच्चे प्रियंका (33), नीतू (25), मोनू (23), ध्रुव (15) और शिवम (15) शामिल थे।
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- फोटो : कुमार संजय
भावनेश उर्फ भुप्पी घर में ही किराने की दुकान चलाता था जबकि ललित की लकड़ी की दुकान थी। तड़के किराने की दुकान के लिए दूध और ब्रेड आया था, लेकिन 7.00 बजे तक जब न तो भावनेश की दुकान खुली और न ही ब्रेड-दूध उठा तो एक बुजुर्ग पड़ोसी घर के ऊपर पहुंचे। ऊपर पहुंचते ही उनके होश उड़ गए।
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पहली मंजिल पर पहुंचने पर अंदर छत पर लगे लोहे के जाल पर फंदे से पूरा परिवार लटका था। उनके हाथ-पैर बंधे थे। सभी की आंखों पर सफेद रंग की पट्टी भी बंधी हुई थी। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। घटना आग की तरह फैली और हड़कंप मच गया।