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Burari Case: मौत का वो दिन याद करते ही बैठ जाता है दिल...खामोश हो जाती है जुबां, घर के आगे से निकलने में भी लगता था डर
Fri, 01 Jul 2022 11:07 AM IST
शाहरुख खान
किशन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
किशन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 01 Jul 2022 11:07 AM IST
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burari death case
- फोटो : अमर उजाला
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बुराड़ी में एक जुलाई 2018 को चूण्डावत परिवार के 11 लोगों की सामूहिक आत्महत्या की झकझोर देने वाली घटना को चार साल हो गए हैं। संत नगर की गली नंबर चार में आज भी वह घटना लोगों में जिंदा है। हालांकि, लोगों का कहना है कि वह मार्मिक घटना को दोबारा याद नहीं करता चाहते। क्योंकि, घटना को याद करते हुए उनका दिल बैठ जाता है व जुबां खामोश हो जाती है। संत नगर का मकान नंबर 137/5/2 को पूरे देश जानता है। यही नहीं विदेश में भी 11 लोगों की मौत ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। घटना के बाद से मकान में परिवार का कोई भी शख्स नहीं रहता है। हालांकि, मकान को नया किरदार मिल गया है, जो बीते तीन सालों से यहां परिवार के साथ रह रहा है। मकान में रह रहे मोहन ने बताया कि पहले उनकी बुराड़ी मुख्य रोड पर डायग्नोस्टिक लैब थी।
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वह परिवार को अच्छी तरह जानते थे और उनके अच्छे संबंध थे, लेकिन परिवार में क्या चल रहा है, इसे लेकर किसी भी अन्य शख्स को जानकारी नहीं थी। परिवार की मौत के एक साल बाद उन्होंने घर के निचला हिस्सा किराये पर ले लिया।
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- फोटो : अमर उजाला
अब उसी मकान में मोहन डायग्नोस्टिक लैब व एक किराना की दुकान चला रहे हैं। मोहन बताते हैं कि शुरुआत में डर की वजह से लोग दुकान से सामान भी खरीदना पसंद नहीं करते थे। लेकिन, वक्त के साथ-साथ चीजें सामान्य होती गई और दुकान भी चलने लगी।
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- फोटो : विवेक निगम
साथ ही डायग्नोस्टिक लैब भी चल रही है। मोहन कहते हैं कि आज भी वह घटना को याद करते हुए मन भर आता है। पूरा जीवन चाहकर भी इस दर्दनाक घटना को भुलाया नहीं जा सकता है।
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मोहन के पड़ोसी व बीते 14 सालों से संत नगर में रहे रविंद्र ने बताया कि परिवार काफी मिलनसार था। परिवार के जाने से बाद से पूरी गली के लोगों को धक्का लगा।