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इच्छामृत्यु की मंजूरी: हर माह 50 हजार का खर्चा, मदद लेने से भी इनकार, पिता का अपार संघर्ष और प्यार; छलका दर्द

अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 12 Mar 2026 01:19 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हरीश के पिता अशोक राणा ने कहा कि असाध्य कष्ट से गुजर रहे परिवारों के लिए फैसला उम्मीदों भरा है। सर्वोच्च न्यायालय के मानवीय निर्देशों के लिए हम आभारी हैं। 

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Harish Rana Case Decision filled with hope for families going through incalculable hardship
Harish Rana Case - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
सर्वोच्च न्यायालय के मानवीय निर्देशों के लिए हरीश के पिता अशोक राणा ने आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह फैसला सिर्फ उनके बेटे के लिए नहीं, बल्कि उन सभी परिवारों के लिए उम्मीद है, जो ऐसे असाध्य कष्ट से गुजर रहे हैं। उनके लिए यह राहत की तरह है, जहां उपचार संभव नहीं रह जाता और केवल आरामदेह देखभाल की जरूरत होती है।


बुधवार को मीडिया से बातचीत में अशोक राणा ने बताया कि यह आदेश तब आया जब हरीश की स्थिति असाध्य और लाइलाज हो गई। सर्वोच्च न्यायालय ने हरीश को दिए जा रहे जीवनरक्षक उपचार को बंद करने और इसके बाद उपशामक व आरामदेह देखभाल की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के लिए वह लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
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Harish Rana Case Decision filled with hope for families going through incalculable hardship
हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अशोक राणा भावुक होकर बोले, 'कौन से माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा चाहेंगे। यह सिर्फ मेरे बेटे की बात नहीं है, देश में ऐसे न जाने कितने बच्चे हैं।' इतना कहते-कहते उनका गला भर आया। उन्होंने कहा कि जो माता-पिता अपने बच्चों को इस हालत में देखते हैं, उनका दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हम चाहते हैं कि सबका भला हो।

 
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बेटे हरीश के साथ माता-पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके परिवार के लिए बेहद कठिन है, लेकिन वे हरीश के सर्वोत्तम हित में निर्णय चाहते हैं। साथ ही उम्मीद जताई कि न्यायालय के इस आदेश से भविष्य में ऐसे अन्य परिवारों को भी मानवीय व्यवहार और सहानुभूति के साथ राहत मिल सकेगी।
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हरीश के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अदालत के आदेश लागू करने में लापरवाही का आरोप
अशोक राणा ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार अदालत के आदेश के बाद भी उन्हें लागू करने में लापरवाही की जाती है। इससे आम लोगों को परेशान होना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अदालत आदेश करती है, लेकिन प्रदेश सरकार लागू नहीं कराती। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने फिजियोथेरेपिस्ट और नर्स की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया था, लेकिन वह सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। यह भी बताया कि गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ के सीएमओ व डॉक्टरों की टीम ने जांच की बात कही थी, लेकिन उन्होंने एम्स के डॉक्टरों के पैनल से ही जांच कराने की मांग की थी।
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बेटे हरीश के साथ मां - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फीडिंग ट्यूब से दिया जा रहा जीवनरक्षक उपचार
हरीश को वर्तमान में परक्यूटेनियस एंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टोमी (पीईजी) ट्यूब के माध्यम से जीवनरक्षक उपचार दिया जा रहा है। अदालत के आदेश के बाद इसे बंद कर दिया जाएगा। उन्हें उपशामक व आरामदेह देखभाल दी जाएगी, ताकि प्रकृति अपना कार्य कर सके। इसके लिए हरीश को दिल्ली स्थित एम्स ले जाया जाएगा।
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