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इच्छामृत्यु की इजाजत: पीजी की चौथी मंजिल से गिरे थे हरीश, फिर कभी न उठे, परिवार के 13 साल के संघर्ष की कहानी

अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 11 Mar 2026 02:44 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने एक असाधारण फैसला सुनाते हुए 13 साल से कोमा में रह रहे हरीश राणा को पैसिव इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी है। यह निर्णय भारत में 'मानव गरिमा के साथ मरने के अधिकार' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कोर्ट ने यह फैसला 2018 के 'कॉमन कॉज' मामले में दिए गए अपने ऐतिहासिक निर्णय और 2023 में जारी किए गए संशोधित दिशानिर्देशों के आधार पर सुनाया है। आइए जानते हैं हरीश के परिवार के 13 साल के संघर्ष की कहानी।

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Harish Rana Case Parents Seek Organ Donation After Mercy Death Approval for Quadriplegic Son in Ghaziabad
हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उम्र ढल रही है और माता-पिता को यह डर सता रहा है कि वे हमेशा अपने बेटे के साथ नहीं रह पाएंगे। ऐसे में बेटे के लिए इच्छा मृत्यु की मांग करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन हर दिन उसे इस हालत में देखना भी उनके लिए बेहद पीड़ादायक है। 


माता-पिता चाहते हैं कि इच्छा मृत्यु की अनुमति मिलने के बाद हरीश के शरीर के जो अंग काम कर रहे हैं, उन्हें दान कर दिया जाए ताकि दूसरों को नया जीवन मिल सके। यह मार्मिक बातें हरीश के पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट से बेटे की इच्छा मृत्यु की अनुमति मिलने के बाद कहीं।
 
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Harish Rana Case Parents Seek Organ Donation After Mercy Death Approval for Quadriplegic Son in Ghaziabad
हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज अंपायर में रहने वाले 31 वर्षीय हरीश राणा पिछले करीब 13 साल से बिस्तर पर हैं। उनकी सांसें तो चल रही हैं, लेकिन शरीर पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। वह क्वाड्रिप्लेजिया बीमारी से पीड़ित हैं और 100 प्रतिशत दिव्यांग हो चुके हैं। 

 
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हरीश राणा और उसके पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश की मां निर्मला देवी ने बेटे की इच्छा मृत्यु की अनुमति के लिए पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन 8 जुलाई को अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

 
Harish Rana Case Parents Seek Organ Donation After Mercy Death Approval for Quadriplegic Son in Ghaziabad
हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पीजी की चौथी मंजिल से गिरे थे हरीश
पिता अशोक राणा ने बताया कि वर्ष 2013 में रक्षाबंधन के दिन हरीश पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर और कमर में गंभीर चोट आई थी। उस समय परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद वह ठीक हो जाएंगे, लेकिन हादसे के बाद से वह बिस्तर से उठ नहीं पाए।

 
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हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिजन पिछले 13 वर्षों से हरीश के इलाज और देखभाल में लगे हुए हैं। उनका इलाज पीजीआई चंडीगढ़, एम्स, आरएमएल, एलएनजेपी और अपोलो सहित कई बड़े अस्पतालों में कराया गया, लेकिन कोई खास सुधार नहीं हो सका।
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