नोएडा की कई बहुचर्चित घटनाओं को देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन (सीबीआई) भी नहीं सुलझा सकी है। कई मामलों में तो सीबीआई ही उलझ गई और आरोपियों को कोर्ट से राहत मिल गई। वहीं, एक मामले की जांच सीबीआई करती रही। जबकि, दूसरी एजेंसी ने घटना का खुलासा कर दिया। अभी भी कई मामलों की जांच सीबीआई के पास हैं लेकिन, इन मामलों में अभी तक सीबीआई कुछ खास सफलता हासिल नहीं कर सकी है। ऐसे में न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ित आज भी एजेंसी और कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।
आरुषि हत्याकांड समेत ये छह मामले बने सीबीआई के गले की फांस, बरसों बाद भी नहीं खुला राज
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1- आरुषि हेमराज हत्याकांड - 13 मई 2008, सीबीआई जांच - 1 जून 2008
घटना - सेक्टर-27 जलवायु विहार में आरुषि तलवार व उसके नौकर हेमराज की हत्या कर दी गई। घटना के 17 दिन बाद ही सीबीआई ने जांच शुरू की। सीबीआई ने मामले में दो बार अपनी क्लोजर रिपोर्ट बदली लेकिन, कोर्ट में दोनों ही खारिज हो गईं।
स्टेट्स - सीबीआई कोर्ट, गाजियाबाद से सजायाफ्ता आरुषि के माता डॉ. नूपुर व पिता डॉ. राजेश तलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई और सीबीआई की तमाम दलीलें कोर्ट ने खारिज कर दीं।
2 - एमिटी छात्र जस्टिन की हत्या का मामला - 3 सितंबर 2009, सीबीआई जांच - 2010
घटना - सेक्टर-125 स्थित एमिटी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले 18 वर्षीय बीटेक छात्र की स्वीमिंग पूल में रहस्मय ढंग से मौत हो गई। मामले में जस्टिन के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया था। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई ने शुरू की थी।
स्टेट्स - अभी गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट में मामले की सुनवाई हो रही है और इससे जुड़े कई लोगों को कोर्ट ने नोटिस व समन भेजा है। मामले में दो लोगों के खिलाफ सीबीआई कोर्ट ने गैर जमानती वारंट भी जारी किया है।
3 - अंकित चौहान हत्याकांड - 13 अप्रैल 2013, सीबीआई जांच - अक्तूबर 2015
घटना- सेक्टर-76 स्थित बरौला बाईपास में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के वक्त अंकित अपनी फॉच्यूर्नर से ऑफिस से घर लौट रहा था। मामले की सीबीआई जांच ही करती रही गई जबकि दूसरी एजेंसी ने पर्दाफाश कर दिया।
स्टेट्स - इस हत्याकांड की जांच में सीबीआई चूक गई और यूपी एसटीएफ की टीम ने इस ब्लाइंड मर्डर का खुलासा कर दिया। यूपी एसटीएफ ने 2 जून 2017 को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर गुत्थी सुलझा दी। घटना फॉच्यूर्नर लूट के इरादे से अंजाम दी गई थी।
4 - शशांक यादव मर्डर मिस्ट्री - 13 मार्च 2013, सीबीआई जांच - 13 अक्तूबर 2014
घटना - इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के इंजीनियर शशांक यादव का शव 13 मार्च 2013 को नोएडा स्टेडियम के महिला शौचालय में लटका मिला था। मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। लेकिन, कोई सुराग नहीं मिलने पर इसे सीबीआई को जांच के लिए भेज दिया गया।
स्टेट्स - साढ़े तीन साल की जांच के बाद भी सीबीआई को अब तक कुछ नहीं मिला। मामले की जांच सीबीआई की टीम कर रही है और सुनवाई सीबीआई कोर्ट में चल रही है। अब तक किसी आरोपी की पहचान नहीं हुई है।