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सरकार ये तस्वीर बदलनी चाहिए: पढ़ाई छोड़ गोटी खेल रहीं छात्राएं, न ड्रेस पहनने; न बैग की जरूरत, 'गुरु' भी गायब
सद्दाम हुसैन, अमर उजाला, पिनगवां
Published by: विकास कुमार
Updated Thu, 29 Jan 2026 09:14 PM IST
सार
अमर उजाला संवाददाता द्वारा बुधवार और गुरुवार लगातार दो दिन ग्राउंड पर जाकर किए गए निरीक्षण में कई खामियां सामने आईं। स्कूल में मिड-डे मील के तहत केवल दाल-चावल बनाए जा रहे थे और वह भी बेहद कम मात्रा में। मिड-डे मील से जुड़ा कोई मेन्यू चार्ट स्कूल परिसर में नहीं लगा हुआ था। स्कूल के कई कमरों की हालत जर्जर है, कुछ कमरों की तो वर्षों से छत ही नहीं बनी है, जबकि कई कमरे खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।
शिक्षा किसी भी समाज की सबसे मजबूत नींव होती है। इसी नींव पर आने वाली पीढ़ियों का भविष्य, जिले का विकास और देश की प्रगति टिकी होती है। जब स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और मूलभूत सुविधाएं मिलती हैं, तभी एक सशक्त समाज का निर्माण संभव हो पाता है। लेकिन हरियाणा के पिनगवां खंड के गोकलपुर गांव स्थित गवर्नमेंट मिडिल स्कूल की स्थिति इस आदर्श सोच के बिल्कुल विपरीत नजर आई।
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स्कूल में मौजूद छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
न ड्रेस पहनने की जरूरत... न बैग लाने की
स्कूल के रजिस्टर में जहां 500 से अधिक बच्चों के नाम दर्ज हैं, वहीं मौके पर केवल 10 बच्चे ही उपस्थित मिले। न तो बच्चों ने स्कूल ड्रेस पहन रखी थी और न ही उनके पास स्कूल बैग था। पढ़ाई के समय बच्चे स्कूल के बरामदे में गोटी खेल रहे थे, जिससे शैक्षणिक माहौल पूरी तरह से गायब नजर आया। स्कूल में कुल नौ अध्यापकों की नियुक्ति है, लेकिन केवल चार अध्यापक ही स्कूल में मौजूद मिले, जबकि शेष अध्यापक नदारद पाए गए।
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स्कूल में गोटी खेलती छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
इस बार भी नहीं बदली तस्वीर
हैरानी की बात यह है कि बच्चों की परीक्षाएं नजदीक हैं, इसके बावजूद पढ़ाई को लेकर कोई गंभीरता नजर नहीं आई। बीते वर्ष मेवात जिला हरियाणा में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे फिसड्डी रहा था और इसका मुख्य कारण बच्चों की कमजोर शैक्षणिक स्थिति मानी गई थी। मौजूदा हालात देखकर लगता है कि अबकी बार भी कुछ स्कूलों की तस्वीर नहीं बदली है।
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खाली पड़े बेंच
- फोटो : अमर उजाला
मिड-डे मिल पर मिलता है सिर्फ दाल-चावल
अमर उजाला संवाददाता द्वारा बुधवार और गुरुवार लगातार दो दिन ग्राउंड पर जाकर किए गए निरीक्षण में कई खामियां सामने आईं। स्कूल में मिड-डे मील के तहत केवल दाल-चावल बनाए जा रहे थे और वह भी बेहद कम मात्रा में। मिड-डे मील से जुड़ा कोई मेन्यू चार्ट स्कूल परिसर में नहीं लगा हुआ था। स्कूल के कई कमरों की हालत जर्जर है, कुछ कमरों की तो वर्षों से छत ही नहीं बनी है, जबकि कई कमरे खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। बच्चों के लिए शौचालय और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी स्कूल में उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्कूल परिसर में असामाजिक तत्वों द्वारा नशा किए जाने की घटनाएं भी होती रहती हैं, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
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स्कूल में मौजूद ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
समय पर नहीं आते हैं अध्यापक
जाहिद एडवोकेट, लियाकत, प्रवेज, शमशेर, इजारुल, आफताब, सफी और फत्ता सहित ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल में न तो बच्चों की नियमित पढ़ाई होती है और न ही सरकार की योजनाओं का लाभ बच्चों को मिल पा रहा है। अध्यापक समय पर स्कूल नहीं आते और जो आते हैं, वे भी पढ़ाई में रुचि नहीं लेते। वहीं अध्यापकों का कहना है कि बच्चों के माता-पिता उन्हें नियमित रूप से स्कूल नहीं भेजते, जिससे उपस्थिति कम रहती है। कुल मिलाकर गोकलपुर का यह सरकारी स्कूल शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की एक गंभीर तस्वीर पेश कर रहा है, जिस पर प्रशासन और शिक्षा विभाग को जल्द संज्ञान लेना चाहिए। लगभग 1 बजे स्कूल में सीआरसी हैड राजयोग भी पहुंच गए, जिन्होंने ग्रामीणों को समझाया और कार्रवाई की बात कही ।
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