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गोकुलपुरी अग्निकांड: तन पर बचे सिर्फ कपड़े, गृहस्थी बसाने की सता रही चिंता, मंजर याद कर छलक पड़ता है दर्द 

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Sun, 13 Mar 2022 04:06 AM IST
सार

उत्तर-पूर्वी जिलाधिकारी गीतिका शर्मा समेत जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों को देखते ही पीड़ितों का दर्द छलक उठा।

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Only clothes left on the body worrying about settling the household pain spilling over remembering the scene in Gokulpuri fire
fire in gokalpuri delhi - फोटो : जी पाल

गोकुलपुर गांव स्थित झुग्गियां जलने से दर्जनों परिवारों के 150 लोग सड़क पर आ गए हैं। आग में उनका पूरा सामान जल चुका है। सिर्फ तन पर पहने हुए कपड़े बचे हैं। इनमें कई परिवार इतने टूटे चुके हैं कि दोबारा से अपनी गृहस्थी बसाने की चिंता उनके सिर से नहीं उतर रही है।



हालांकि, अस्थायी तौर पर दिल्ली सरकार की ओर से उनकी मदद के लिए राहत शिविर का बंदोबस्त किया गया है। उत्तर-पूर्वी जिलाधिकारी गीतिका शर्मा समेत जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों को देखते ही पीड़ितों का दर्द छलक उठा। किसी ने हाथ जोड़कर तो किसी ने पैर पड़कर मदद की गुहार लगाई। अफसरों ने पीड़ितों को राहत का आश्वासन देते हुए उनकी मदद का बंदोबस्त करना शुरू किया।

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fire in gokalpuri delhi - फोटो : अमर उजाला
मेट्रो स्टेशन के पास बनाया राहत शिविर
जिलाधिकारी गीतिका शर्मा ने बताया कि मदद के तौर पर इलाके में ही एक अस्थायी कैंप बनाया गया है। शुरुआती तौर पर 33 झुग्गियां जलने की सूचना है, जिनमें 150 से अधिक परिवार रहते थे। पीड़ितों की मदद के लिए इलाके मेट्रो स्टेशन के पास 35 झुग्गियों का राहत शिविर बनाया गया है। इसमें रहने और खाने-पीने की व्यवस्था की गई है। साथ ही दो मोबाइल टॉयलेट वैन भी शिविर के पास मौजूद रहेगी। मौके पर मौजूद प्रशासनिक स्तर के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि जब तक पीड़ितों के रहने का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक प्रशासन पीड़ितों के रहने की व्यवस्था करेगा। इस संबंध में निगम से भी संपर्क किया जा रहा है, जिससे सामुदायिक केंद्र को राहत शिविर में बदला जा सके।
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नहीं थम रहे हैं आंसू 
स्थानीय लोगों के मुताबिक, आसपास स्थित दो प्लॉटों में करीब 33 झुग्गियां जली हैं। इनमें दर्जनों परिवारों के 150 से अधिक लोग रहते थे। यह लोग आसपास अन्य किराए के घरों में बने शौचालयों पर निर्भर थे। हादसे के बाद से पीड़ित लोग सदमे में हैं। आशियाना उजड़ने के बाद उनके आंसू नहीं थम रहे हैं।
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fire in gokalpuri delhi - फोटो : अमर उजाला
लोगों का आरोप देरी से पहुंचीं दमकल की टीमें
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की टीमें देरी से मौके पर पहुंची थीं। इस वजह से नुकसान का दायरा बढ़ता गया। स्थानीय निवासी श्याम कली के मुताबिक, आग लगने के कुछ मिनटों में ही दमकल विभाग को फोन कर दिया था, लेकिन काफी देर तक दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर नहीं थी। इस बीच स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास जारी रखा। हालांकि, मौके पर मौजूद अधिकारियों का कहना था कि कॉल मिलने के कुछ मिनटों में ही दमकल विभाग की टीमें पहुंच गई थीं।
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पारा चढ़ने के साथ अग्नि हादसे बढ़े
राजधानी में पारा चढ़ने के साथ ही आग लगने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हो जाता है। सर्दियों में औसतन आग लगने की लगभग 60 कॉल हर दिन आती हैं और गर्मियों में बढ़कर 120 से 130 के बीच हो जाती है। दमकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, एक अप्रैल 2021 से 11 मार्च 2022 के बीच दिल्ली फायर सर्विस के पास कुल 26,672 कॉल आई। इसी अवधि के दौरान 46 लोगों की मौत हो गई, जबकि 373 लोग झुलस गए। अधिकारियों का कहना है कि इस साल मार्च की शुरुआत के साथ ही शायद कोई ऐसा दिन गया हो, जिस दिन कोई न कोई आग की बड़ी घटना न हुई हो।

 
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