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दिल्ली धमाका अब भी दे रहा दर्द: बढ़ा मौत का आंकड़ा, बेटा बोला- पांच मिनट पहले बुक हो जाती कैब तो बच जाते पापा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विकास कुमार
Updated Mon, 17 Nov 2025 07:11 PM IST
सार
सुधांशु के मोबाइल पर अचानक 6.55 मिनट पर कैब की राइड रद्द होने का मैसेज आया तो उसने तुरंत कैब चालक को कॉल राइड रद्द करने की वजह पूछी। कैब चालक ने बताया कि लाल किला पर बम धमाका हो गया है।
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दिल्ली धमाके में जान गंवाने वाले विनय पाठक
- फोटो : अमर उजाला
लाल किला के पास 10 नवंबर को हुए बम धमाके में घायल दो और शख्स ने सोमवार तड़के इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतक की शिनाख्त विनय पाठक (55) और लुकमान (50) के रूप में हुई है। धमाके वाले दिन विनय ओल्ड लाजपतराय मार्केट में सामान खरीदने के लिए आए थे। सड़क के दूसरी ओर खड़ी कैब में सवार होने के लिए वह सड़क पार कर रहे थे कि धमाका हो गया।
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विनय पाठक
- फोटो : अमर उजाला
विनय की टांग हो गई थी शरीर से अलग
हादसे में विनय बुरी तरह जख्मी हो गए थे। उनकी एक टांग भी शरीर से अलग हो गई थी। उनके शरीर के अंदरूनी अंगों को क्षति पहुंची थी। करीब सात दिन आईसीयू में जिंदगी के लिए जंग लड़ने के बाद आखिर उनकी हार हुई। एनआईए की टीम ने सोमवार दोपहर बाद पोस्टमार्टम के बाद उनका शव परिजनों के हवाले कर दिया।
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दिल्ली में धमाके के बाद की तस्वीरें
- फोटो : PTI
पांच मिनट पहले बुक हो जाती कैब तो बच जाते पापा
नम आंखों से विनय पाठक के बेटे सुधांशु ने बताया कि यदि पांच मिनट पहले कैब बुक हुई होती तो शायद उसके पिता की जान बच जाती। कैब बुक करने के बाद चालक सड़क के दूसरी ओर पहुंचा। उसने पहले सुधांशु को कॉल किया। बाद में बेटे ने पिता को कॉल कर सड़क पार कर कैब में जाने के लिए कहा, लेकिन उससे पहले ही धमाका हो गया।
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दिल्ली में धमाके के बाद की तस्वीरें
- फोटो : PTI
बिहार के रहने वाले थे विनय पाठक
एक परिजन ने बताया कि मूलरूप से समस्तीपुर बिहार के रहने वाले विनय पाठक अपने परिवार के साथ दिल्ली के आया नगर में रहते थे। इनके परिवार में पत्नी आनंदा पाठक, दो बेटे अनीश पाठक और सुधांशु के अलावा एक शादीशुदा बेटी है। विनय का सीसीटीवी लगाने के अलावा प्रॉपर्टी का कारोबार था। सुधांशु पिता के साथ ही काम करता था।
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दिल्ली में धमाके के बाद की तस्वीरें
- फोटो : PTI
सीसीटीवी और एलईडी लेने गए थे विनय
बड़ा बेटा नोएडा की एक एमएनसी में काम करता है। 10 नवंबर को विनय पाठक ओल्ड लाजपत राय मार्केट में सीसीटीवी और एलईडी का सामान खरीदने गए थे। सामान खरीदने के बाद उन्होंने पोर्टर से कुछ सामान घर भेज दिया। एलईडी पोर्टर वाला ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ। शाम करीब 6.00 बजे विनय पाठक ने बेटे सुधांशु को कॉल किया और यह बात बताई।
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