एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शाहीन परवीन
Updated Wed, 25 Dec 2024 07:30 AM IST
सार
Atal Bihari Vajpayee Jayanti: भारत इस बार अटल बिहारी वाजपेयी का 100वीं जयंती मना रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी, भारतीय राजनीति के एक महान नेता और प्रभावशाली विचारक थे। इनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ था। ऐसे में आइए जानते हैं भारत के 10वें प्रधानमंत्री कितने पढ़े लिखे थे।
विज्ञापन
1 of 5
Atal Bihari Vajpayee Jayanti
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
Atal Bihari Vajpayee Jayanti 2024: अटल बिहारी वाजपेयी जयंती, जो हर साल 25 दिसंबर को मनाई जाती है, भारत के सबसे प्रिय और दूरदर्शी नेताओं में से एक अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। अपनी वाकपटुता, राजनीतिक कौशल और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए जाने जाने वाले वाजपेयी की विरासत लाखों भारतीयों को प्रेरित करती है। यह दिन न केवल उनके योगदान का सम्मान करता है बल्कि अखंडता, एकता और प्रगति के उनके मूल्यों की याद भी दिलाता है।
2 of 5
Atal Bihari Vajpayee Jayanti
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को एक हिंदू ब्राह्मण परिवार में कृष्णा देवी और कृष्ण बिहारी वाजपेयी के घर हुआ था। वाजपेयी के पिता एक स्कूल शिक्षक थे।
3 of 5
Atal Bihari Vajpayee Jayanti
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
राजनीति विज्ञान में किया एमए
अटल बिहारी वाजपेयी के पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी एक स्कूल मास्टर और कवि थे। वाजपेयी ने अपनी स्कूली शिक्षा ग्वालियर के गोरखी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर से की। ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (जिसे अब लक्ष्मीबाई कॉलेज कहा जाता है) से हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
बाद में, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री ने कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति विज्ञान में मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) की डिग्री हासिल की। एम.ए. पूरा करने के बाद वाजपेयी की विदेशी मामलों में रुचि विकसित हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
Atal Bihari Vajpayee Jayanti
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
अटल बिहारी वाजपेयी का कैरियर
एक छात्र के रूप में, अटल बिहारी वाजपेयी 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का हिस्सा थे। बाद में 1939 में एक स्वयंसेवक के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में शामिल हो गए। 1942 तक, वे आरएसएस के एक सक्रिय सदस्य बन गए थे। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वाजपेयी और उनके बड़े भाई को 24 दिनों के लिए गिरफ्तार भी किया गया था। 1951 में, वाजपेयी को आरएसएस द्वारा तत्कालीन नवगठित हिंदू दक्षिणपंथी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनसंघ के लिए काम करने के लिए चुना गया था। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया।
1957 के भारतीय आम चुनाव में वाजपेयी ने लोकसभा का चुनाव लड़ा। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू वाजपेयी की भाषण कला से बहुत प्रभावित हुए थे। 1968 में दीनदयाल उपाध्याय की मृत्यु के बाद वाजपेयी भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
विज्ञापन
5 of 5
Atal Bihari Vajpayee Jayanti
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
हिंदी में भाषण देने वाले पहले विदेश मंत्री
1977 के आम चुनावों में भारतीय जनसंघ समेत कई दलों के गठबंधन ने जनता पार्टी बनाई जिसने आम चुनावों में जीत हासिल की। उस समय वाजपेयी विदेश मंत्री थे। विदेश मंत्री के तौर पर वाजपेयी भारत के पहले व्यक्ति भी थे जिन्होंने 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया था। 1980 में भारतीय जनसंघ ने मिलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) बनाई और वाजपेयी इसके पहले अध्यक्ष बने।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X