अंग्रेजी भाषा की बढ़ती मांग और हिंदी का वजूद बनाए रखने के लिए हर साल देशभर में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। आज के समय में हिंदी शहरी इलाकों की बोल-चाल से लगभग समाप्त होती जा रही है। बता दें, 15 अगस्त 1947 को जब देश अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों से आजाद हुआ था तब संविधान सभा में एक विश्वासमत से हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया गया था। वर्तमान भारत में हिंदी समाचार पत्र की संख्या अंग्रेजी समाचार पत्र की तुलना में निरंतर बढ़ती जा रही है लेकिन फिर भी हिंदी हाशिये पर है।
ऑडिट ब्यूरो सर्कुलेशन के अनुसार साल 2006 से 2016 तक हिंदी अखबारों के पाठकों का ग्राफ 8.76 फीसदी तक बढ़ा है। वहीं अंग्रेजी अखबार के पाठकों का ग्राफ 2.87 प्रतिशत तक ही सीमित है। यह आंकड़ें बताते हैं कि आज भी हिंदी भाषा का वर्चस्व कायम है। भारत के आजाद होने के दो साल बाद यानी 1949 में 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में घोषित किया गया था। तब से हम इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं।
आइए जानते हैं हिंदी समाचार पत्र और अंग्रेजी समाचार पाठकों बारे में
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अखबार
भले ही आज भारत में तेजी से अंग्रेजी बोलने व पढ़ने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही हो लेकिन आज भी हिंदी पाठकों की संख्या अव्वल है और पाठक आज भी हिंदी के ही ज्यादा हैं। आंकड़े बताते हैं कि भारत में सर्वाधिक पढ़ें जाने वाले समाचार पत्रों में पहला, दूसरा और चौथा स्थान हिंदी अखबारों का ही है। ये सभी समाचार पत्र प्रतिदिन पाठकों के बीच अपनी जगह बनाने में कामयाब भी हैं।
हिंदी दिवस मनाने की प्रथा कब और कैसे शुरू हुई थी।
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लेकिन यह जानना अहम हो जाता है कि संविधान सभा ने देवनागरी लिपी में लिखी हिंदी को राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया।
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भारतीय प्रिंट मीडिया
- फोटो : सोशल मीडिया
हिंदी की खास बात यह है कि इसमें जिस शब्द को जिस प्रकार से उच्चारित किया जाता है, उसे लिपि में उसी प्रकार लिखा भी जाता है। भारत की राजभाषा हिन्दी दुनिया में दूसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। भारत में हिन्दी भाषी राज्यों की आबादी 46 करोड़ से अधिक है। 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत की 1.2 अरब आबादी में से 41.03 फीसदी की मातृभाषा हिंदी है।
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यहां यह जानना जरूरी है कि 14 सितंबर को हिंदी दिवस और 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।
हिन्दी को दूसरी भाषा के तौर पर इस्तेमाल करने वाले अन्य भारतीयों को मिला लिया जाए तो देश के लगभग 75 प्रतिशत लोग हिन्दी बोल सकते हैं। भारत के इन 75 प्रतिशत हिंदी भाषियों सहित पूरी दुनिया में तकरीबन 80 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो इसे बोल या समझ सकते हैं।
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