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जूते की दुकान से IAS बनने तक का सफर, ऐसे की थी तैयारी

Sun, 26 Jan 2020 10:53 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Garima Garg Updated Sun, 26 Jan 2020 10:53 PM IST
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shubham gupta ias upsc 2018 topper success story
2018 के टॉपर शुभम गुप्ता - फोटो : Facebook

आज हम आपको 2018 के टॉपर शुभम गुप्ता की कहानी बता रहे हैं। जूते की दुकान से आईएएस बनने तक का सफर बेहद कठिनाई भरा रहा है। पिता के कह देने भर से बेटे ने वो मुकाम हासिल कर दिखाया, जिसके लिए लोग न जानें कितने सालों से मेहनत कर रहे हैं पर अभी तक मंजिल नहीं पा सकें। 



आखिर कैसे की उन्होंने तैयारी? क्या थी वो स्ट्रेटजी? इन सब सवालों के जवाब मिलेंगे यहां। पढ़ते हैं आगे...

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2018 के टॉपर शुभम गुप्ता - फोटो : Facebook
  • शुभम ने एक इंटरव्यू में बताया कि वे जयपुर के एक मिडिल क्लास परिवार से हैं। 
  • बचपन से ही वे पिता के साथ उनकी दुकान पर बैठते थे। कारोबार के कारण उनकी और उनके पिता की मुलाकात बड़े-बड़े अफसरों से होती थी। 
  • पिता ने कहा कि कलेक्टर बन जाओ और बेटे ने अपने पिता की बात का मान रखा। 
  • बचपन में शुभम का परिवार जयपुर छोड़कर महाराष्ट्र शिफ्ट हो गया। उन्होंने बताया कि उस वक्त आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उन्हें अपना शहर छोड़ना पड़ा। 
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2018 के टॉपर शुभम गुप्ता - फोटो : Facebook
  • वहां उनके पिता को जूते की दुकान खोलनी पड़ी। 
  • उनके गांव में हिंदी और अंग्रेजी मीडियम का एक भी स्कूल नहीं था। 10वीं कक्षा की पढ़ाई मराठी भाषा में करना बेहद मुश्किल था। 
  • चूंकि शुभम को मराठी समझ नहीं आती थी इसलिए उनके पिता ने उनका और उनकी बहन का दाखिला गांव से दूर एक स्कूल में करवाया। 
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2018 के टॉपर शुभम गुप्ता - फोटो : Facebook
  • स्कूल घर से 80 किमी. की दूरी पर था इसलिए वे अपनी बहन के साथ सुबह 6 बजे की ट्रेन पकड़ते थे और स्कूल से अपने घर शाम 3 बजे आते थे। 
  • पिता को लगा की एक दुकान से काम नहीं चलेगा इसलिए उनके पिता ने बेटे के स्कूल के पास भी अपनी जूते की दुकान खोली। उस पर शुभम ने बैठना शुरू कर दिया। वे दुकान पर काम करने के साथ -साथ पढ़ाई भी किया करता था। 
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2018 के टॉपर शुभम गुप्ता - फोटो : Facebook
  • काम के साथ पढ़ाई करने के बावजूद भी शुभम ने सीजीपीए हासिल किया। अच्छे नंबर के कारण लोगों ने कहा कि तुम्हें विज्ञान विषय के साथ आगे बढ़ना चाहिए पर शुभम को वाणिज्य ज्यादा पसंद था इसलिए वे वाणिज्य के साथ गए। 
  • बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे दिल्ली आ गए। दिल्ली से शुभम ने दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम में दाखिला लिया और वहीं से ही एमकॉम की भी पढ़ाई पूरी की। 
  • 2015 में वे यूपीएससी की तैयारी में लग गए। पहले प्रीलिम्स में वे सफल नहीं हो पाए। उन्होंने इस पर बोला कि मैं अपनी असफलता का कारण अपने द्वारा की गई लापरवाही और ठीक प्रकार से न बनाया गया टाइमटेबल को मानता हूं। 
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