हिंदी में स्टैंडअप कॉमेडी का नया अंदाज शुरू करने वाले मशहूर लेखक व गीतकार वरुण ग्रोवर की बतौर निर्देशक पहली फिल्म ‘ऑल इंडिया रैंक’ की रिलीज की तैयारियां इन दिनों जोरों पर हैं। फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग भी मुंबई में हो चुकी हैं, लेकिन पता चला है कि इस फिल्म मे दिखाए गए कुछ दृश्यों को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालयों ने आपत्ति जताई है और इन्हें फिल्म से हटाने के लिए फिल्म बनाने वालों को सूचित किया है।
All India Rank: आर्थिक सुधारों के जनक मनमोहन सिंह को दिखाने पर सेंसर बोर्ड खफा, हटेंगे कुछ और नेताओं के सीन
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‘अंधाधुन’, ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’, ‘थ्री ऑफ अस’ और हालिया रिलीज ‘मेरी क्रिसमस’ जैसी समीक्षकों द्वारा अति प्रशंसित फिल्में बनाने वाली कंपनी मैचबॉक्स की अगली फिल्म ‘ऑल इंडिया रैंक’ की रिलीज 23 फरवरी को प्रस्तावित है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी आईआईटी से इंजीनियरिंग में स्नातक वरुण ग्रोवर ने ये फिल्म अपने उन दिनों की याद में लिखी है जब आईआईटी की प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए उन पर खासा मानसिक दबाव हुआ करता था। इस फिल्म की पटकथा पर वरुण कोई 10 साल पहले काम कर चुके थे और गीतकार जयदीप साहनी ने ये पटकथा तब निर्देशक श्रीराम राघवन के साथ साझा की ही।
मैचबॉक्स को फिल्म ‘ऑल इंडिया रैंक’ बनाने का सुझाव भी श्रीराम राघवन ने ही दिया और फिल्म के पोस्टर पर उनका नाम भी प्रस्तुतकर्ता लिखा हुआ है। ये पहली फिल्म है जिसे श्रीराम राघवन प्रस्तुत कर रहे हैं। फिल्म की हाल ही में हुई स्पेशल स्क्रीनिंग में भी श्रीराम राघवन मौजूद रहे। फिल्म की कहानी 90 के उन दशकों की कहानी है जब भारत में आर्थिक उदारवाद की बयार शुरू शुरू ही हुई थी। फिल्म में उस समय के प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह का जिक्र इन आर्थिक सुधारों की बातों के क्रम मे आता है।
सेंसर बोर्ड के सूत्र बताते हैं कि फिल्म ‘ऑल इंडिया रैंक’ को बोर्ड की परीक्षण समिति (एग्जामिनिंग कमेटी) ने देख लिया है और समिति ने अपनी सिफारिशें भी सेंसर बोर्ड को बता दी हैं। सेंसर बोर्ड ने फिल्म में नरसिंह राव और मनमोहन सिंह के उल्लेख के साथ साथ उनकी फुटेज दिखाने पर आपत्ति जताई है। इन दृश्यों को हटाने की सलाह भी फिल्म बनाने वालों को दी जा चुकी है। सिनेमाघरों में रिलीज के लिए सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट इन दृश्यों को हटाने के बाद ही दिए जाने की बात सामने आई है।
सेंसर बोर्ड से मिला सर्टिफिकेट इन दिनों फिल्मों को ओटीटी पर रिलीज करने के लिए भी काफी महत्वपूर्ण हो गया है। भारत में सक्रिय देसी, विदेशी सारे ओटीटी इन दिनों किसी फिल्म को एक निश्चित मियाद तक चलाने के लिए (लीज पर) लेने से पहले निर्माताओं को अपनी फिल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने के लिए भी इसीलिए कह रहे हैं ताकि सेंसर बोर्ड से पारित कराने की जिम्मेदारी फिल्म बनाने वालों पर ही रहे। हालांकि ये ओटीटी संचालक जो फिल्में खुद बना रहे हैं, उनके लिए ये बाध्यता अभी तक नहीं देखने को मिली है।
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