अभिनेता अनुपम खेर अपने फिल्मी करियर में 450 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। जब भी वह स्क्रीन आते हैं, अपनी एक अलग छाप छोड़ते हैं। अनुपम खेर कहते हैं कि हर फिल्म में वह एक नवोदित कलाकार की तरह काम करते हैं। भारतीय सिनेमा में अनुपम खेर ने कई यादगार भूमिकाएं निभाई हैं। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार की तरफ से साल 2004 पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। 7 मार्च 1955 को शिमला में जन्मे अनुपम खेर के जन्मदिन पर आइए जानते हैं, उनके करियर के 10 दमदार किरदारों के बारे में...
Anupam Kher: अनुपम खेर की ये 10 फिल्में बनीं अदाकारी की मास्टर क्लास, हर किरदार में एक अलग रस, दसवीं बोनस में
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फिल्म : सारांश (25 मई 1984)
किरदार : बी वी प्रधान
अभिनेता अनुपम खेर ने अपने करियर की शुरुआत राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म 'सारांश' से की। महेश भट्ट के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अनुपम खेर ने बी वी प्रधान की भूमिका निभाई थी। महज 28 साल की उम्र में 65 वर्षीय व्यक्ति बीवी प्रधान की भूमिका को अनुपम खेर ने ऐसा जीवंत किया कि आज भी उनके इस किरदार को याद किया जाता है। अनुपम खेर खुद मानते हैं कि आज तक इसी फिल्म की सफलता से इंडस्ट्री में टिके हैं।
फिल्म : कर्मा (8 अगस्त 1986)
किरदार : डॉ. माइकल डैंग
निर्माता - निर्देशक सुभाष घई की फिल्म 'कर्मा' में अनुपम खेर ने अनुपम खेर ने डॉक्टर माइकल डैंग का किरदार निभाया था। इस किरदार से अनुपम खेर का नाम इंडस्ट्री के सुपरहिट विलेन की लिस्ट में शामिल हो गया। उनके इस किरदार ने परदे के बाहर भी लोगों को डरा दिया था। इस फिल्म का डायलॉग ‘इस थप्पड़ की गूंज सुनी तुमने? अब इसी गूंज की गूंज तुम्हें जिंदगी भर सुनाई देगी।’, काफी फेमस हुआ था। इस फिल्म से अनुपम खेर ने साबित कर दिया कि वह नकारात्मक भूमिकाएं बखूबी निभा सकते हैं।
फिल्म : दिल ( 22 जून 1990)
किरदार : हजारी प्रसाद
निर्माता - निर्देशक इंद्र कुमार की फिल्म 'दिल' में अनुपम खेर ने आमिर खान के पिता हजारी प्रसाद की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में अनुपम खेर ने एक कंजूस और लालची आदमी की भूमिका निभाई थी जो अपने बेटे के लिए धनी लड़की का सपना देखता रहता है। इस फिल्म में अनुपम खेर के हास्य पक्ष को दर्शाया गया और वह अपने किरदार में खूब चमके।
फिल्म : सौदागर (9 अगस्त 1991)
किरदार : मंधारी
निर्माता - निर्देशक सुभाष घई की फिल्म 'सौदागर' की कहानी दो जिगरी दोस्तों राजेश्वर सिंह और वीर सिंह की है जो बाद में एक दूसरे के जानी दुश्मन बन जाते हैं। इस फिल्म में अनुपम खेर ने एक बूढ़े अपंग व्यक्ति मंधारी की भूमिका निभाई थी। मंधारी, वासु और राधा को राजेश्वर सिंह और वीर सिंह की कहानी सुनाते हैं और मंधारी के वजह से ही दोनों दोस्त फिर से एक होते हैं। इस फिल्म में वीर सिंह की भूमिका दिलीप कुमार, राजेश्वर सिंह की भूमिका राज कुमार, वासु की भूमिका विवेक मुशरान और राधा की भूमिका मनीषा कोइराला ने निभाई थी। इस फिल्म में अनुपम खेर का बहुत ही महत्वपूर्ण किरदार था।