वरिष्ठ अभिनेत्री हेलन 60 और 70 के दशक में फिल्मों में आइटम नंबर करने के लिए मशहूर रहीं। 'मेरा नाम चिन चिन चू', 'यम्मा यम्मा', 'ओ हसीना जुल्फों वाली' कुछ ऐसे आइटम नंबर हैं जो हेलन के यादगार नृत्य की याद दिलाते हैं। बर्मा (अब म्यांमार) में द्वितीय विश्वयुद्ध का शिकार हुई हेलन जापानी सेना से बचकर जब लहूलुहान होकर अपने परिवार के साथ भारत पहुंचीं तो उन्हें यहां नई जिंदगी मिली। और, यहीं से शुरू हुआ हेलन का फिल्मी सफर। आज उनके जन्मदिन के मौके पर हम हेलेन पर फिल्माए गए कुछ यादगार गीतों और उनकी बेहतरीन फिल्मों की चर्चा करेंगे।
Happy Birthday Helen: इन 10 किरदारों ने हेलन को बनाया सुपरस्टार, एक में तो सलमान की मां भी बनीं
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हावड़ा ब्रिज (1958)
हेलन ने बहुत ही कम उम्र में अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। कारण था घर में कमाने वाली सिर्फ हेलन की मां थीं, जिनकी तनख्वाह परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं थी। उनकी एक पारिवारिक दोस्त कुकू उस समय हिंदी सिनेमा में एक अभिनेत्री थीं। उन्होंने हेलन की मदद फिल्मों में कोरस डांसर का काम दिलाने के लिए की। इसी बीच हेलन ने 'अलिफ लैला', 'शबिस्तान', 'आवारा' जैसी फिल्मों में डांस किया। उन्हें अपना पहला बड़ा काम तब मिला जब उन्हें शक्ति सामंत की वर्ष 1958 में आई फिल्म 'हावड़ा ब्रिज' में मशहूर गीत 'मेरा नाम चिन चिन चू' पर प्रस्तुति देने का मौका मिला। हेलन के लिए यह गाना गीता दत्त ने गाया। यहां से हेलन का अच्छा वक्त शुरू हुआ।
चाइना टाउन (1962)
नाचने के साथ हेलन ने कुछ नाटकीय किरदारों के साथ अभिनय में भी अपने करियर की शुरुआत की। उन्हें शक्ति सामंत की रोमांटिक थ्रिलर फिल्म 'चाइना टाउन' में एक सहायक भूमिका निभाने का मौका मिला। इस फिल्म में शम्मी कपूर, शकीला, हेलन और मदन पुरी मुख्य भूमिकाओं में हैं। यहां हेलन माइक की प्रेमिका सूजी के किरदार में नजर आईं। यह कहानी दो बिछड़े भाइयों शेखर और माइक की है जो अलग-अलग रास्तों पर चल पड़ते हैं। माइक और शेखर दोनों मिलते भी हैं लेकिन एक दुश्मन बन कर। लेकिन, सूजी दोनों की सच्चाई पता करके इन्हें मिलाने का काम करती है। इस फिल्म में शम्मी कपूर और हेलन पर फिल्माया गाना 'यम्मा यम्मा' सुपरहिट साबित हुआ।
गुमनाम (1965)
हेलन लगातार फिल्मों के तमाम गीतों पर डांस तो करती ही रहीं, साथ ही उन्हें फिल्मों में कुछ किरदार भी मिलने लगे थे। उन्हें उनकी जिंदगी का पहला चर्चित किरदार राजा नवाथे कि वर्ष 1965 में आई फिल्म 'गुमनाम' में मिला। यहां हेलन किट्टी कैली के किरदार में नजर आईं। किट्टी को फिल्म के बाकी सभी मुख्य किरदारों के साथ विदेश घूमने का मौका मिलता है। जिस जहाज से सभी लोग विदेश जाते हैं वह अचानक किसी अनजान जगह पर उतारा जाता है और वहां उनकी जिंदगी में अजीब घटनाएं शुरू होती हैं। फिल्म में हेलन के अलावा मनोज कुमार, नंदा, प्राण, महमूद, आदि बेहतरीन कलाकार शामिल हैं। मशहूर गीत 'हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं' इसी फिल्म में हेलन और महमूद पर फिल्माया गया है। इस फिल्म में बेहतरीन काम करने के लिए हेलन को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया।
शिकार (1968)
जाने-माने फिल्म निर्माता और निर्देशक गुरुदत्त के छोटे भाई आत्माराम के निर्माण और निर्देशन में बनी फिल्म 'शिकार' एक थ्रिलर ड्रामा फिल्म है। इसकी कहानी एक हत्या की छानबीन के इर्द-गिर्द ही घूमती है। फिल्म में धर्मेंद्र, आशा पारेख, संजीव कुमार, हेलन और जॉनी वॉकर मुख्य भूमिकाओं में हैं। हेलन ने इस फिल्म में वीरा की भूमिका निभाई है जो कहानी में नरेश माथुर की हुई हत्या की एक संदिग्ध है। फिल्म का मशहूर गीत 'पर्दे में रहने दो पर्दा ना उठाओ' तो मुख्य अभिनेत्री आशा पारेख पर फिल्माया गया है। जबकि, फिल्म के दूसरे हिट गीत जैसे; 'हाय मेरे पास तो आ' को हेलन और संजीव कुमार पर और 'मैं अलबेली प्यार जता कर ले लेती हूं जान' हेलन और जॉनी वॉकर पर फिल्माए गए हैं। इस फिल्म में भी हेलन को सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया।