कोरोना महामारी का प्रकोप जैसे जैसे कम हो रहा है, लोग घरों से बाहर आ रहे हैं। अपने परिचितों से मिल रहे हैं और एक दूसरे के हाल चाल भी पूछ रहे हैं। इन मुलाकातों में कुछ कहानियां ऐसी भी सामने आ रही हैं, जिन्हें सुनकर दिल धक से रह जाता है। किसी ने अपने घरवालों को खो दिया। किसी ने अपनों को अपनी आंखों के सामने जाते देखा तो किसी को इसी संकट की घड़ी में ‘भगवान’ भी मिले।
एक हीरोइन की कोरोना डायरी: खुद किया पिता का अंतिम संस्कार, ‘देवदूत’ बनकर मदद करने आए थे पड़ोसी
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ऐसी ही एक कहानी है अभिनेत्री कविता वर्मा की। कविता ने पिछले तीन चार-साल में काफी निजी नुकसान झेला है। उनकी बहन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मां सदमे में चल बसीं। पिता चरण सिंह सेना के रिटायर्ड कर्नल तो रहे लेकिन बुजुर्ग होने के कारण लगातार दूसरों पर आश्रित रहे। बेटे ने उनको सहारा नहीं दिया तो कविता अपने पिता को मुंबई ले आईं।
कविता बताती हैं, “पापा मेरे साथ कई साल से थे। उनका लगातार इलाज चल रहा था। लेकिन कोरोना महामारी फैली तो सब पहले जैसा नहीं रहा। हालांकि मैं शुक्रगुजार हूं उन चिकित्सकों की जो पहले की तरह ही पापा को देखने आते रहे और उनका इलाज सुचारू रूप से जारी रखने में मदद करते रहे। मुंबई में मैं और मेरे पापा, बस यही दो लोग घर पर साथ रहते थे।”
लेकिन, कविता वर्मा को संकट का असली मतलब समझ आया जून के महीने में। जब उनके पिता का स्वास्थ्य एकदम से बिगड़ने लगा। एक सुबह तो हालत इतनी बिगड़ गई कि कुछ समझ ही नहीं आया। कविता कहती हैं, “पापा को नियमित देखने आने वाले डॉक्टर ने बताया कि उनके अंग काम करना बंद कर रहे हैं। पापा को तुरंत आईसीयू में ले जाने की जरूरत थी। मैंने एंबुलेंस बुलाई और पापा को लेकर अस्पताल भागी। लेकिन, अस्पताल? मुंबई में सब कुछ मिलने लगा था लेकिन अस्पताल मिलना ही मुश्किल था।”