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सोनू निगम के बाद इला और अभिजीत ने साधा म्यूजिक माफिया पर निशाना, कविता कृष्णमूर्ति और उदित ने कही ये बात
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: shrilata biswas
Updated Sun, 05 Jul 2020 04:07 PM IST
गायक सोनू निगम की तरफ से शुरू की गई पक्षपात वाली बहस में अब अभिजीत भट्टाचार्य, कविता कृष्णमूर्ति और इला अरुण जैसे कुछ और लोकप्रिय गायक भी उतर आए हैं। इस बहस में अपनी बात रखते हुए अभिजीत भट्टाचार्य ने कहा है कि पक्षपात जैसी चीजें अब बहुत ज्यादा होने लगी हैं। उन्होंने बताया कि उनके समय में संगीतकार और फिल्म निर्देशक तय करते थे कि किस गीत को कौन सा गायक गाएगा। इसमें निर्माता कोई हस्तक्षेप नहीं करते थे।
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अभिजीत भट्टाचार्य
- फोटो : सोशल मीडिया
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इस समय बहस चल रही है कि कुछ फिल्म निर्माता पूरी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कंट्रोल कर रहे हैं। इस बहस में अभिजीत ने कहा, 'यह बहुत ज्यादा हो रहा है। 90 के दशक में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उस समय तो यह सोचा भी नहीं जा सकता था। एक गायक से कोई गाना दूसरे गायक को दिया जाता था लेकिन उसकी एक प्रमाणिक वजह होती थी। तब चीजें इतनी गंदी नहीं हुआ करते थीं।'
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सलमान खान
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अभिजीत आगे कहते हैं, 'किसी भी फिल्म के निर्देशक और संगीतकार ही यह तय करते थे कि इस गीत को कौन गायक गाएगा, न कि कोई निर्माता कंपनी या कोई कलाकार। यह फैसला करने वाले सलमान खान कौन होते हैं कि किस गीत को कौन गायक गाएगा और कौन नहीं? किसी भी गायक से गीत छीनकर खुद गा लेने वाले सलमान खान होते कौन हैं? यहां तो सीधे-सीधे पक्षपात दिखाई देता है।'
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कविता कृष्णमूर्ति
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भारतीय संगीत की दुनिया की लोकप्रिय गायिका कविता कृष्णमूर्ति कभी किसी म्यूजिक लेवल के साथ जुड़ी नहीं रही हैं। उन्होंने वही गाने गाए हैं जिसके लिए उन्हें कहीं से आमंत्रण मिला हो। उनके लिए यह नया बदलाव कैसा है? यह बताते हुए वह कहती हैं, 'वंशवाद मेरे समय में कभी नहीं था। वहां गुटबाजी हुआ करती थी लेकिन उससे कभी किसी को नुकसान नहीं हुआ। एक निर्माता कभी भी संगीतकार के आड़े नहीं आता था।'
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कविता कृष्णमूर्ति
- फोटो : सोशल मीडिया
अपनी बात को जारी रखते हुए कविता कहती हैं, 'किसी में भी इतना साहस नहीं था कि वह आरडी बर्मन, खय्याम साहब, ओपी नैयर या रविंद्र जैन से यह कह सके कि आप इस गायक को ले लीजिए। यह सब खुद अपने फैसले लिया करते थे। अगर एक गाना किसी गायक पर फिट नहीं बैठ रहा है तो वह दूसरा संगीत बनाया करते थे। पहले संगीतकारों का कहना था कि गायक की आवाज सूट करनी चाहिए। इसलिए संगीतकार अलग-अलग आवाजों जैसे, अलका याग्निक, अनुराधा पौडवाल और मेरे लिए संगीत बनाया करते थे।'
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