अजय देवगन की फिल्म 'शैतान' में देखा जाए तो अभिनय के मामले में अभिनेत्री जानकी बोदीवाला अव्वल नंबर पर रही हैं। फिल्म में बच्ची सी दिखने वाली इस अदाकारा ने अजय देवगन और ज्योतिका की किशोरवय बेटी जाह्नवी का किरदार निभाया है। लेकिन, गुजराती सिनेमा में काम करते हुए जानकी को लंबा अरसा हो चुका है और वह इस समय 28 साल की हैं। जिस गुजराती फिल्म 'वश' की ‘शैतान’ हिंदी रीमेक है उसमें जानकी ने आर्या की भूमिका निभाई थी। 30 अक्तूबर 1995 को अहमदाबाद में जन्मी जानकी हिंदी सिनेमा में अपनी डेब्यू फिल्म 'शैतान' को लेकर काफी उत्साहित हैं। उनसे एक खास बातचीत...
Janki Bodiwala Interview: ‘शैतान’ की पूरी शूटिंग खुद को संभाले रखा, लेकिन आखिरी दिन जज्बात हुए बेकाबू और फिर..
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अभिनय की तरफ आप का झुकाव कैसे हुआ?
मैंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत गुजराती फिल्म इंडस्ट्री से की। जिस तरह से आम लड़कियों की बचपन में सोच होती हैं कि एक्टिंग करनी है, उसी तरह की मेरी भी सोच रही है। बचपन में सभी अभिनेत्रियों को देख कर लगता था कि एक्टर ही बनना है। जब फिल्में देखती थी तो मुझे लगता था कि फिल्म की एक्ट्रेस खुद ही गा रही हैं, लेकिन जब होश संभाला तब समझ में आया कि गाने तो किसी और ने गाए हैं, बस उन गानों पर वह परफॉर्म कर रही हैं। मुझे काजोल, करीना कपूर खान और आलिया भट्ट की फिल्में बहुत पसंद हैं। उनकी फिल्में देखकर ही अभिनय की तरह मेरा झुकाव हुआ।
गुजराती फिल्म इंडस्ट्री में आपकी शुरुआत कैसे हुई ?
मेरी शुरुआत गुजराती फिल्म 'छेलो दिवस' से हुई। इस फिल्म के लिए मैंने ऑडिशन दिया, उसमें मेरा चयन हो गया। यह फिल्म साल 2015 में रिलीज हुई और साल की सबसे बड़ी हिट फिल्म रही हैं। इस फिल्म से पहले अभिनय के बारे में मुझे कुछ नहीं पता था, क्योंकि न ही मैंने कहीं से एक्टिंग सीखी है और न ही थियेटर किया है। जो भी मैंने सीखा है फिल्मों में काम करके ही सीखा है। 'छेलो दिवस' के बाद मैंने गुजराती में 'ओ तारी' 'तंबूरो', 'दाउद पकाड', 'छुट्टी जशे छक्का', 'तारि माटे वन्स मोर', 'बाऊ ना विचार', 'नाड़ी दोष' और 'वश' जैसी फिल्मों में काम किया।
पहली बार कैमरा फेस करने का अनुभव कैसा रहा ?
मैं बहुत ही नर्वस थी। फिल्मों से मेरा दूर-दूर तक कोई नाता नहीं और ना ही मेरे परिवार का। मुझे बिल्कुल भी पता नहीं था कि सेट पर कितने लोग होते हैं, कैमरे के सामने कैसे परफॉर्म करना है। मैं उस स्टूडेंट की तरह थी, जो बिना किसी तैयारी के एग्जाम हाल में थी। मेरी स्थिति बिल्कुल वैसी ही थी। पहले दिन जब शूटिंग पर गई तो उस दिन मेरा पहला सीन नहीं था। मैं चुपचाप कोने में खड़े होकर सब देख रही थी कि कैसे सब लोग परफॉर्म कर रहे हैं। उस फिल्म की शूटिंग के दौरान बहुत कुछ सीखने को मिला।
गुजराती फिल्म 'वश' की रीमेक के जरिए आपकी हिंदी सिनेमा में एंट्री हो गई। जब 'शैतान' के लिए पहली बार आप से संपर्क किया गया तो आपकी प्रतिक्रिया क्या थी?
मैं बहुत खुश थी कि गुजराती फिल्म का हिंदी में रीमेक बन रहा है। यह बहुत बड़ी बात है। गुजराती फिल्म इंडस्ट्री अभी धीरे-धीरे उन्नति कर रही है। जिस हिसाब से गुजराती फिल्में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं, उस हिसाब से हिंदी में रीमेक बनाना बहुत बड़ी बात है। फिल्म 'शैतान' के लिए प्रोडक्शन टीम से फोन आया था। पहले मुझे पता था कि यह होने वाला है। लेकिन मुझे तब तक यकीन नहीं हुआ जब तक फिल्म रिलीज नहीं हो गई। जब फिल्म रिलीज हो गई तक मुझे यकीन हुआ कि हां यार, यह हुआ है।