इस साल की उन चुनिंदा फिल्मों में एक फिल्म ‘मैं लड़ेगा’ भी शामिल है, जिसे स्वतंत्र निर्माताओं (इंडी प्रोड्यूसर्स) ने बनाया, खुद ही सिनेमाघरों तक पहुंचाया और ये साबित किया कि फिल्म की कहानी में जान हो तो फिल्म खुद बोलती है। निर्देशक गौरव राणा के निर्देशन में बनी इस फिल्म के हीरो आकाश प्रताप सिंह अपनी फिल्म की रिलीज के बाद पहली बार अपने शहर कानपुर पहुंचे तो उनका पूरा का पूरा मोहल्ला, दोस्त-यार और घर वाले सब उनका स्वागत करने कानपुर एयरपोर्ट पर उमड़ पड़े। मां ने अपने बेटे का ये खैरमकदम देखा तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक ही आए।
Akash Pratap Home Coming: ‘मैं लड़ेगा’ के हीरो आकाश का कानपुर में जोरदार स्वागत, गले मिलते ही रो पड़ी मां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आकाश प्रताप ने सिनेमा की पहली छलांग निर्माता निर्देशक नीरज पांडे की फिल्म ‘बेबी’ में अपने मोनोलॉग से लगाई थी। हीरो बनने की चाह उन्हें कानपुर से मुंबई लाई। मां अनीता सिंह का हरदम साथ मिला और आकाश अपनी मम्मी की हर बात को गांठ से बांधकर रखे रहे हैं। वह बताते हैं, “मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार वही रहा है जब मां ने मुझे सिनेमा के परदे पर देखने के बाद फोन किया और कहा कि बहुत नीक लागत हौ भैया पिक्चर मइहा।”
आकाश प्रताप सिंह ने कोई 12 साल संघर्ष किया है मनोरंजन जगत में। नासिक के वॉर मेमोरियल हॉस्टल में रहकर स्कूली पढ़ाई करने वाले आकाश ने उस दोहे को भी चरितार्थ करने की भरसक कोशिश की है कि लीक लीक गाड़ी चलै, लीकहिं चलै कपूत। लीक छांड़ि तीनहि चलैं सायर सिंह सपूत। और, अपने सपूत की पहली फिल्म रिलीज होने के बाद उसे लेने कानपुर एयरपोर्ट पहुंची आकाश की मां कहती हैं, “आकाश बचपन से बड़ा जिद्दी रहा है। जो जिद कर ली उसे पूरा करके ही रहा। हीरो बनना भी उसकी जिद ही रही है।”
Stree 2: हमारी फिल्मों के भूत समाज की भ्रांतियां हैं, 'सरकटा' पितृसत्ता का विकृत रूप है: नीरेन भट्ट
फिल्म ‘मैं लड़ेगा’ आकाश ने लिखी भी खुद ही है। इस फिल्म में आकाश ने अपने निजी जीवन के अनुभवों को इसकी कहानी में पिरोया है। ये फिल्म एक ऐसे छात्र की कहानी है जिसे स्कूल के दबंग छात्र खूब परेशान करते हैं और फिर वह एक दिन न झुकने की ठान लेता है और कहता है, ‘मैं लड़ेगा’। आकाश बताते हैं कि मुंबई वह सिर्फ अपनी मां और नानी का आशीर्वाद लेकर आए थे। फौज से सेवानिवृत पिता योगेंद्र प्रताप सिंह कभी नही चाहते थे कि उनका बेटा हीरो बनने मुंबई जाए।
Abhishek Banerjee: 'स्त्री 2' के लिए शूट किया था सीन, 'मुंजा' में हो गया इस्तेमाल, अभिषेक को खुद नहीं पता था
‘अमर उजाला’ से एक खास बातचीत में आकाश ने कहा था कि बिना किसी फिल्मी पृष्ठभूमि के बाहर से आने वाले लोगों का सफर मुंबई में बहुत मुश्किल होता है। लेकिन, वह यह भी कहते हैं कि अगर इरादे पक्के हों और हौसला मजबूत हो तो कामयाबी तो मिलती ही है, बस कोशिशें बंद नहीं होनी चाहिए। आकाश जल्द ही कानपुर आकर उसी रामा देवी चौराहे पर अपनी फिल्मी यात्रा का जश्न मनाना चाहते हैं, जहां उन्होंने न जाने कितने दिन मस्ती करते हुए बिताए।