निर्माता वाशू भगनानी और निर्देशक रंजीत एम तिवारी की फिल्म ‘बेलबॉटम’ ने फिल्म वितरकों और सिनेमाघर मालिकों की बांछें खिला दी हैं। फिल्म को मिल रहे अच्छे रिव्यूज से उनकी उम्मीदें बंधी है कि दर्शक सिनेमाघरों में लौटना शुरू कर देंगे। देश के सबसे बड़े फिल्म वितरण क्षेत्र का हिस्सा रहे मुंबई व महाराष्ट्र में सिनेमाघर न खुलने से फिल्म के वितरक भले मायूस हों, लेकिन बॉक्स ऑफिस कमाई में दूसरे और तीसरे नंबर पर रहने वाले वितरण क्षेत्रों दिल्ली-यूपी और ईस्ट पंजाब में फिल्म के रिकॉर्डतोड़ कमाई करने की आशा है। दिल्ली एनसीआर के तमाम सिनेमाघरों में फिल्म के एक ही दिन में एक दर्जन से अधिक शो हो रहे हैं, कुछ सिनेमाघरों में तो फिल्म के सुबह 10 बजे से लेकर रात 10 बजे तक 20 शोज तक हो रहे हैं। इस बीच मुंबई में थिएटर ना खुलने के चलते फिल्म का प्रेस शो इसके निर्माता ने मुंबई के तमाम पत्रकारों को एक चार्टर्ड प्लेन से सूरत ले जाकर किया।
एनसीआर के थिएटर्स में ‘बेलबॉटम’ के 24 घंटे में 18 शोज, प्रेस शो के लिए मुंबई के समीक्षक सूरत पहुंचे
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निर्माता वाशू भगनानी को कभी हिंदी सिनेमा में प्रोड्यूसर नंबर वन का तमगा मिला था। ये तमगा उनकी लार्जर दैन लाइफ फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर मिलने वाली कामयाबी के चलते तो मिला ही था, इसमें उनकी फिल्म इंडस्ट्री में बनी उस छवि का भी हाथ रहा जिसमें उनको एक जबरदस्त मेजबान माना जाता था। फिर धीरे धीरे वाशू भगनानी को फिल्ममेकिंग में हस्तक्षेप करने का मर्ज लगा। अच्छे निर्देशकों को किनारे कर वह ऐसे लोगों को लेकर फिल्में बनाने लगे जो उनकी हर बात मानते थे और नतीजा हुआ, पूजा फिल्म्स की लाइन से फ्लॉप फिल्में। फिल्म ‘बेलबॉटम’ की शुरूआत में लिखा आता है स्पेशल थैक्स – पूजा भगनानी। लखनऊ की रहने वाली पूजा भगनानी दरअसल वाशू भगनानी की पत्नी हैं। उन्हीं के नाम पर उनकी नई कंपनी पूजा एंटरटेनमेंट भी बनी है।
Bellbottom Review: रंजीत तिवारी ने जासूसी सिनेमा का खींचा नया खाका, अक्षय ने बेलबॉटम बनकर जमाई धाक
पूजा एंटरटेनमेंट का काम वाशू भगनानी के बेटे जैकी के कमान संभालने के बाद गड़बड़ाया। हीरो वह बन नहीं पाए और फिल्में बनाने वाली अपनी घर की कंपनी की देखरेख वह ठीक से कर नहीं पाए। लंदन में अपना ठिकाना बना चुके वाशू भगनानी ने फिल्म ‘बेलबॉटम’ से एक बार फिर अपनी कंपनी की कमान संभाली है। फिल्म की मेकिंग जिस हिसाब से कोरोना प्रोटोकॉल के हिसाब से की गई है, उसे देखकर ही हैरत होती है कि किसी निर्माता ने इस तरह की शूटिंग कोरोना संक्रमण काल के दौरान कर कैसे ली। और, ये कोरोना की दूसरी लहर आने से पहले की बात है। ग्लासगो फिल्मसिटी में शूट की गई फिल्म ‘बेलबॉटम’ से ही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लोग काम पर लौटे थे।
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और, अब फिल्म ‘बेलबॉटम’ से ही लोग सिनेमाघरों में लौटना शुरू कर रहे हैं। दिल्ली में हुए फिल्म ‘बेलबॉटम’ के प्रेस शो में सवा सौ से ज्यादा लोग फिल्म देखने डिलाइट सिनेमाघर पहुंचे। सिंगल स्क्रीन थिएटरों में सबसे नायाब थिएटर माने जाने वाले डिलाइट में हालांकि प्रेस शो के दौरान तकनीकी खराबी के चलते फिल्म बीच में थोड़ी देर रुकी भी रही लेकिन फिल्म देखने के लिए जुटे लोगों के उत्साह से फिल्म के दिल्ली यूपी के वितरक उत्साहित हैं। पूरे देश में फिल्म ‘बेलबॉटम’ करीब 1900 स्क्रीन्स पर रिलीज हो रही है और उनमें सबसे ज्यादा संख्या दिल्ली-यूपी के सिनेमाघरों की ही है। नोएडा और दिल्ली के कुछ सिनेमाघरों में फिल्म के एक दिन में 20-20 शोज तक हो रहे हैं।
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वहीं मुंबई में सिनेमाघरों के न खुलने के चलते निर्माता वाशू भगनानी यहां के फिल्म पत्रकारों को चार्टर्ड प्लेन से लेकर बुधवार को सूरत चले गए। सूरत में हुए फिल्म शो को मुंबई के पत्रकारों और समीक्षकों ने देखा और उन दिनों को याद किया जब वाशू भगनानी की मेजबानी के लिए लोग इंतजार किया करते थे। वाशू भगनानी हिंदी सिनेमा के ऐसे पहले फिल्म निर्माता हैं जिन्होंने अपनी एक फिल्म का संगीत जमीन से 35 हजार फिट ऊपर हवाई जहाज में लॉन्च किया था। वाशू भगनानी फिल्म निर्माण के अलावा रियल इस्टेट के भी बड़े कारोबारी रहे हैं। इन दिनों उनका ज्यादातर वक्त लंदन में बीतता है। फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा ये भी है कि वह अप्रवासी भारतीय बन चुके हैं।
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