अक्षय कुमार की हिस्टोरिकल ड्रामा फिल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' बड़े पर्दे पर छाने के लिए तैयार है। इसी कड़ी में रिलीज से पहले अभिनेता अक्षय कुमार ने फिल्म की पूरी टीम के साथ गुजरात में सोमनाथ और वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर पूजा अर्चना की। अब न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू के अक्षय कुमार ने काशी के दौरे और फिल्म के निर्देशक डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद बात की है।
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अक्षय कुमार
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
साक्षात्कार के दौरान बात करते हुए अक्षय कुमार बताया, वह वाराणसी यानी काशी धार्मिक कारणों से नहीं बल्कि संस्कृति के लिए और राजा पृथ्वीराज के शहर के जुड़ाव के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए गए थे । अक्षय ने कहा,"काशी सम्राट पृथ्वीराज चौहान से संबंधित है। मैं संस्कृति के लिए गया था। मैं लोगों को यह बताया गया था कि यह हमारी संस्कृति है और यह क्यों जरूरी है। मैं वहां सम्मान देने गया था।"
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अक्षय कुमार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इसके अलावा 'सम्राट पृथ्वीराज' के निर्देशक डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने फिल्म के संदर्भ में हिंदू राष्ट्रवाद पर बात करते हुए कहा, "वह इसे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद कहेंगे और हिंदू राष्ट्रवाद या सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुनरुत्थान में कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि इस राष्ट्र का चरित्र हिंदू है, और जब मैं हिंदू कहता हूं तो इसका मतलब संस्कृति है।" इसके अलावा वाराणसी और सोमनाथ जाने के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वाराणसी सांस्कृतिक राजधानी या भारत की आध्यात्मिक राजधानी है।
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अक्षय कुमार, मानुषी छिल्लर, डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
डॉ द्विवेदी ने आगे कहा कि "क्योंकि देश में इतनी बहस चल रही है, मैंने सोचा कि मैं लोगों को याद दिला दूं कि काशी विश्वनाथ में पहली बार मंदिर को कुतुबुद्दीन ऐबक ने तोड़ा था। वह मुहम्मद गोरी का गुलाम था, जो हमारी फिल्म में है। तो वह भी एक रिश्ता था (हमारे आने के लिए।)"
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चंद्र प्रकाश द्विवेदी के साथ अक्षय-मानुषी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने आगे बात करते हुए कहा कि 1192 के बाद से, देश आक्रमणकारियों के शासन के अधीन रहा है और बहुत यातनाएं हुईं, इतने धर्म परिवर्तन हुए, इस समाज ने बहुत कुछ किया। आज, इस स्वतंत्र देश में, हमारी संस्कृति को वापस लाने का अवसर है और सोमनाथ मंदिर 1948 में इसका एक उदाहरण बन गया, क्योंकि इसे फिर से खोला गया था। उन्होंने आगे कहा, मैं कई बार यह पूछता हूं कि हमारे अपने मंदिरों का पुनर्निर्माण और नवीनीकरण गलत है? यह सिर्फ एक मंदिर नहीं है, यह हमारी आस्था का केंद्र है।