{"_id":"664a18e03090f5862902faa2","slug":"amar-ujala-news-impact-hamare-baarah-producer-admitted-their-film-has-been-shown-in-film-market-cannes-2024-05-19","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Cannes 2024: ‘अमर उजाला’ की खबर का असर, ‘हमारे बारह’ के निर्माताओं ने माना फिल्म मार्केट में हुआ प्रदर्शन","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
Cannes 2024: ‘अमर उजाला’ की खबर का असर, ‘हमारे बारह’ के निर्माताओं ने माना फिल्म मार्केट में हुआ प्रदर्शन
कान फिल्म फेस्टिवल में हर साल अपनी फिल्म के ‘सेलेक्शन’ को लेकर लहालोट रहने वाले मुंबई फिल्म जगत के निर्माता ‘अमर उजाला डॉट कॉम’ की उस खबर के बाद सतर्क हो गए हैं, जिसमें आम फिल्म दर्शकों को ये समझाया गया कि कान फिल्म फेस्टिवल में फिल्म का चयन और वहां किसी फिल्म के प्रदर्शन की प्रक्रिया क्या है। इसी का असर रहा है कि अपनी फिल्म के कान फिल्म फेस्टिवल में ‘चयनित’ होने की खबर का प्रचार करते रहे फिल्म ‘हमारे बारह’ के निर्माताओं ने भी मान लिया है कि उनकी फिल्म वहां लगे फिल्म बाजार में दिखाई गई है।
फिल्म ‘हमारे बारह’ के 77वें कान फिल्म फेस्टिवल में ‘चयनित’ होने की खबर बीते कई दिनों से मुंबई फिल्म जगत में वायरल होती रही है। इस फिल्म को कान में चुने जाने जैसी खबर प्रकाशित कराने के लिए मुंबई की कुछ दिग्गज पीआर एजेंसियां भी सक्रिय रहीं। दावा ये किया गया कि ये फिल्म कान फिल्म फेस्टिवल की इंडियन फिल्म कैटेगरी में चुनी गई है। लेकिन, ‘अमर उजाला’ ने जब इसकी तफ्तीश की तो पता चला कि ये फिल्म कान फिल्म फेस्टिवल (फ्रेंच में – फेस्टिवल दे कान) में नहीं बल्कि वहां लगे फिल्म बाजार (फ्रेंच में – माशे डु फिल्म) में प्रदर्शित हुई है।
3 of 6
हमारे बारह, माशे डु फिल्म का टिकट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मु्ंबई
संयोग ये भी रहा कि जिस दिन ‘अमर उजाला’ ने ‘कान में लगी झूठ की दुकान’ शीर्षक ये तफ्तीश प्रकाशित की, उसी दिन इस फिल्म का वहां प्रदर्शन भी हुआ। फिल्म की इस स्क्रीनिंग का एक एंट्री पास ‘अमर उजाला’ के पास है। इस प्रवेश पत्र पर साफ साफ लिखा है कि ये स्क्रीनिंग भारतीय उद्योगपतियों के समूह कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सीआईआई) के बैनर तले आयोजित की गई। पास पर साफ साफ ये भी छपा देखा जा सकता है कि ये फिल्म वहां माशे डु फिल्म यानी फिल्म बाजार में दिखाई गई है। ये फिल्म किसी भी तरह से कान फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा नहीं मानी जा सकती है। हां, फिल्म फेस्टिवल की ही अवधि में कान में लगे फिल्म बाजार में इसकी स्क्रीनिंग जरूर हुई है।
माशे डु फिल्म यानी कि फिल्म बाजार एक ऐसी जगह है जहां दुनिया का कोई भी फिल्म निर्माता पैसे देकर सिनेमाहाल बुक करा सकता है और अपनी फिल्म की स्क्रीनिंग कर सकता है। लेकिन, पैसे देकर कराई गई इस स्क्रीनिंग को कान फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा नहीं माना जाता है। ये कुछ कुछ वैसे ही है जैसे गोवा में होने वाले भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के तहत दिखाई जाने वाली फिल्मों की सूची फिल्म निदेशालय तैयार करता है, लेकिन वहां लगने वाले फिल्म बाजार में तमाम निर्माता अपनी फिल्मों को बेचने का सौदा भी करते रहते हैं।
विज्ञापन
5 of 6
मंथन स्क्रीनिंग- कान
- फोटो : एएनआई
गौरतलब है कि बिना आमंत्रण के या विभिन्न वर्गों में चुनी गई फिल्मों के प्रतिनिधि हुए बिना कोई भी कलाकार या तकनीशियन अगर खुद के कान फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा बनने का दावा करता है, तो ये फेक न्यूज है। इस फिल्म फेस्टिवल की सबसे महत्वपूर्ण कैटेगरी होती है, कंपटीशन सेक्शन, जिसमें कोई तीन दशक बाद भारत की तरफ से पायल कपाड़िया की फिल्म ‘ऑल वी इमेजिन एज लाइट’ शामिल हुई है। दूसरा अहम सेक्शन कान फिल्म फेस्टिवल का अन सर्टेन रिगार्ड (परिप्रेक्ष्य में) है जिसमें भारतीय फिल्मकार संध्या सूरी की फिल्म ‘संतोष’ शामिल है। फिल्म फेस्टिवल के कान क्लासिक सेक्शन में इस साल श्याम बेनेगल की फिल्म ‘मंथन’ दिखाई गई है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।