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विख्यात निर्देशकों ने बार-बार रिजेक्ट किए अमिताभ, बोले थे-ये कभी अभिनेता नहीं बन पाएगा
Sun, 26 May 2019 03:34 PM IST
विजय जैन
प्रदीप चंद्र और विकास चंद्र सिन्हा
प्रदीप चंद्र और विकास चंद्र सिन्हा
Published by: विजय जैन
Updated Sun, 26 May 2019 03:34 PM IST
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Amitabh Jaya Shweta
- फोटो : twitter
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बहुत से लोगों को याद नहीं होगा कि अमिताभ बच्चन का फिल्मी करियर वॉइस ओवर आर्टिस्ट के तौर पर शुरू हुआ था। 1969 में मृणाल सेन के निर्देशन में बनी ‘भुवन शोम’ में अमिताभ ने अपनी आवाज दी थी। इसके बाद जया बच्चन ने फिल्म में अमिताभ के काम की तहकीकात की, तो मृणाल सेन ने कहा 'उसकी आवाज ठीक है...लेकिन वह कभी अभिनेता नहीं बन पाएगा।' जिस वक्त अमिताभ ने फिल्मी दुनिया में कदम रखे, वह रोमांटिक अभिनेताओं का दौर था। उस दौर में मुख्य अभिनेता का मतलब होता था गोरा-चिट्टा, सुंदर और प्यारे से चेहरे वाला युवा, जो बराबर की सुंदर अभिनेत्री के साथ, सुरम्य स्थानों पर की गई शूटिंग के बाद पर्दें पर भी सुंदर नजर आ सके।
amitabh bachchan
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जाहिर है इन मानकों के बीच में अमिताभ का लंबा-पतला कद, सांवला और चपटा चेहरा किसी भी लिहाज से टिक नहीं पाता। लिहाजा, अमिताभ को बीआर चोपड़ा, ताराचंद बड़जात्या और मनमोहन देसाई जैसे चोटी के निर्देशकों ने बार-बार खारिज किया। बाद में तीनों ने अमिताभ के बारे में अपने रुख में बदलाव किया, खासतौर पर मनमोहन देसाई ने तो अमिताभ को मेगास्टार का तमगा हासिल करने में सही मायनों में मदद भी की। अमिताभ बच्चन को भारतीय सिनेमा में एंग्री यंग मैन क्रांति का चेहरा माना जाता है।
amitabh
अमिताभ बच्चन से पहले भारतीय फिल्मों का नायक चाहे कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न हो अच्छाई और सच्चाई के लिए मरता था। लेकिन अमिताभ ने कुंठित और निराश युवा को अत्याचार और अन्याय के खिलाफ खड़े होने और बदला लेने के भाव से भरा। अमिताभ बच्चन के अभिनय के शुरुआती दौर को एंग्री यंग मैन का पर्याय माना जाता है। एक समारोह में मशहूर अभिनेता अक्षय कुमार अमिताभ बच्चन के सम्मान में बोलते हैं “अमेरिका के पास बैटमैन, सुपरमैन है, हमारे पास एंग्री यंग मैन है।” अमिताभ के एंग्री यंग मैन बनने का सफर भी आसान नहीं रहा है।
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amitabh bachchan
- फोटो : social media
1971 में अमिताभ बच्चन ने पहली बार ‘परवाना’ में एंटी-हीरो किरदार निभाया, तो कहा गया कि उन्हें शर्मीले प्रेमी के किरदार ही निभाते रहना चाहिए। लेकिन, उस दौर में कही गई बातें कितनी गलत साबित हुईं, ये अब सब जानते हैं। हालांकि, अमिताभ बच्चन खुद को हमेशा एंग्री यंग मैन कहे जाने का बुरा तो नहीं मानते, लेकिन सहज भी महसूस नहीं करते हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी ज्यादातर फिल्मों में एंग्री यंग मैन का किरदार नहीं किया है। कई बार उनसे यह पूछा भी गया कि कहीं एंग्री यंग मैन का तमगा उनके लिए बोझ तो नहीं, जिसकी वजह से वह टाइपकास्टिंग का शिकार हुए हों?
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इस सवाल के जवाब में अमिताभ कहते हैं “उन्हें टाइपकास्टिंग से डर नहीं लगता, बल्कि डर इस बात से लगता है कि उन्हें किसी भी किरदार के लिए नहीं रखा जाए।” उनके ज्यादातर प्रशंसक यही चाहते हैं कि आने वाले वक्त में भी वह फिल्मों में कास्ट किए जाते रहें। मुख्यधारा के सिनेमा और इसके अभिनेताओं ने खुद को गंभीरता से लिए जाने के लिए काफी संघर्ष किया है। इसकी कई खामियों को स्वीकार करते हुए, यह कहा जाना चाहिए कि खासकर भारत में मुख्यधारा का सिनेमा लाखों लोगों के लिए खुशी का सबसे बड़ा जरिया है।