बॉलीवुड इंडस्ट्री के महानतम कलाकारों में से एक अमिताभ बच्चन ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से फिल्मी उद्योग में एक ऐसा स्थान हासिल किया है, जिसके आगे सभी सिर झुकाते हैं। बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन अपनी दमदार अदाकारी और अनोखे अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं और अपने इसी हुनर के दम पर वह इंडस्ट्री के महानायक कहलाते हैं। उनके स्वर्णिम करियर को ध्यान में रखते हुए उन्हें बीते कई वर्षों में अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। 70-80 के दशक में एंग्री यंग मैन की छवि हासिल करने वाले अमिताभ, जब भी कैमरे के सामने खड़े होकर हैं.....कहते हैं तो वह मोमेंट किसी फिल्म से कम नहीं होता। बढ़ती उम्र के बाद भी उनका जज्बा और अभिनय का जुनून कहीं से कहीं तक कम नहीं हुआ है। आज हमारे महानायक यानी अमिताभ बच्चन 80 साल के हो गए हैं। इस खास दिन को और स्पेशल बनाने के लिए 'बॉलीवुड का शहंशाह, 80 साल-80 किस्से' सीरीज के तहत हम आपको बॉलीवुड के आइकॉन की 10 आइकॉनिक फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं...
80 साल-80 किस्से: अपनी बेहतरीन अदाकारी के बल पर बॉलीवुड के महानायक बने शहंशाह, इन 10 फिल्मों को देख होगा यकीन
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फिल्म का नाम- आनंद (1971)
साल 1971 में आई फिल्म 'आनंद' अपने जमाने की बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है। वैसे तो फिल्म में लीड रोल में सुपरस्टार राजेश खन्ना थे, लेकिन बाबू मोशाय के साथ सहायक अभिनेता के रूप में अमिताभ बच्चन को देखा गया था। राजेश खन्ना की मौजूदगी के बावजूद अपने सशक्त अभिनय के जरिए अमिताभ ने इस फिल्म में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। 'आनंद' राजेश खन्ना की श्रेष्ठ फिल्म मानी जा सकती है, लेकिन फिल्म देखने के बाद अमिताभ भी दर्शकों के दिमाग में बस जाते हैं। साइड रोल के बाद भी अमिताभ ने बड़े ही शानदार तरीके से स्क्रीन पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। इस फिल्म में बिग बी ने डॉ, भास्कर के.बनर्जी का रोल अदा किया था।
फिल्म का नाम-जंजीर (1973)
अपने करियर की शुरुआत में ढेरों फ्लॉप फिल्में देने बाद जब सबको लगने लगा था कि अमिताभ बच्चन इंडस्ट्री में अपने पैर पसारने में ना कामयाब रहेंगे। तभी साल 1973 में प्रकाश मेहरा निर्देशित फिल्म जंजीर रिलीज हुई थी, जिसने अमिताभ के करियर का रूप-रंग ही बदल कर रख दिया था। अपने जमाने के महान निर्देशक प्रकाश मेहरा जब इंडस्ट्री के कई दिग्गज नायकों के मुंह से फिल्म के लिए न सुनकर थक गए थे, तब हारकर उन्होंने अमिताभ को 'जंजीर' के लिए चुना था। अभिनेता प्राण के साथ जब बिग बी ने फिल्म के लिए पहला ही शॉट शूट किया था, तभी प्रकाश को एक कोने में ले जाकर कह दिया था कि यह लड़का सुपरस्टार बनेगा। बंधी हुई स्टोरी और बेहतरीन अदाकारी से सजी 'जंजीर' ने अमिताभ के एंग्री यंग मैन की नीव रखी थी, जो आज तक कायम है। फिल्म में दिखाए गए अमिताभ के तेवर को निर्माता और निर्देशकों ने फिल्मी पर्दे पर लंबे समय तक भुनाया था।
फिल्म का नाम- दीवार (1975)
फिल्म 'जंजीर' के रिलीज होने के दो साल बाद फिल्मी पर्दे पर अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की फिल्म 'दीवार' ने दस्तक दी। 'जंजीर' के बाद एक बार फिर अमिताभ का नाम इस फिल्म में विजय ही रखा गया था। उस समय हीरो फिल्मों में नकारात्मक भूमिका निभाना पसंद नहीं करते थे, लेकिन 'दीवार' में अमिताभ बच्चन का किरदार ग्रे-शेड का था। दरअसल, फिल्म में अमिताभ ने अपने ईमानदार भाई के मुकाबले अपराध की दुनिया को चुना, जिसके बाद उसकी मां भी उसका साथ छोड़ देती है। फिल्म में नकारात्मक किरदार निभाने के बावजूद भी अमिताभ ने दर्शकों की सहानुभूति बटोर ली थी। इस फिल्म का भगवान पर गुस्सा होने और मंदिर की सीढ़ियों पर मां की गोद में दम तोड़ते हुए अमिताभ आज भी हिंदी फिल्मों के उम्दा दृश्यों में से एक है।
फिल्म का नाम- शोले (1975)
'दीवार' के बाद साल 1975 में ही एक फिल्म रिलीज हुई, जिसने उस जमाने में हिंदी सिनेमा के मायने ही बदल दिए थे। फिल्म में दोस्त जय-वीरू की जोड़ी से लेकर विलेन गब्बर तक आज भी प्रसिद्ध हैं। जय-वीरू और गब्बर का नाम सुन आप समझ गए होंगे की हम 'शोले' की बात कर रहे हैं। फिल्म में जय और वीरू की जोड़ी ने कमाल ढा दिया था। अमिताभ ने इस फिल्म में अपनी अदाकारी का उम्दा प्रदर्शन किया था। बिना बोले अपनी आंखों और चेहरे के भावों के जरिए अमिताभ ने कई दृश्यों को यादगार बना दिया। गब्बर को पकड़ने के लिए और अपने दोस्त की जान बचाने के लिए जय का खुद की जान की बाजी लगा देना सभी के आंसू निकाल देता है।