बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन कई दशकों से सिनेमा जगत में सक्रिय हैं और लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। अमिताभ बच्चन को सदी का महानायक कहा जाता है, लेकिन अपने शुरुआती दिनों में अभिनेता को काफी संघर्ष करना पड़ा था। आज अमिताभ बच्चन अपना 80वां जन्मदिन मना रहे हैं। ऐसे में 'बॉलीवुड का शहंशाह, 80 साल-80 किस्से' सीरीज के तहत हम उनसे जुड़ी कुछ कहानियों को आप तक पहुंचा रहे हैं। तो चलिए आज बताते हैं आपको अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' से जुड़ा यह किस्सा...
80 साल-80 किस्से: आसान नहीं थी बिग बी की सात हिंदुस्तानी तक की राह, पिता से बात करने के बाद मिली थी पहली फिल्म
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मां-बाप को सताती थी चिंता
अमिताभ बच्चन को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था। ऐसे में वह स्कूल और कॉलेज के दौरान नाटकों में हिस्सा लिया करते थे। एक बार वह बीमार पड़ गए और नाटक में हिस्सा नहीं ले पाए। ऐसे में उनका दिल टूट गया, जिसके बाद पिता हरिवंश राय बच्चन ने उन्हें हिम्मत दी। नाटकों में काम करने के साथ-साथ अब उनका मन फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाने का करने लगा था। उन्होंने एक विज्ञापन को देखकर अपनी फोटो टैलेंट हंट प्रतियोगिता के लिए मुंबई भेज दी थी। जब इस बात का पता उनकी मां और बाबूजी को चला, तो वह चिंतित हो उठे। तेजी बच्चन ने उन्हें कहा कि हर मां-बाप का सपना होता है कि उनका बेटा बुढ़ापे का सहारा बने, लेकिन तुमको फिल्मों में जाने का शौक पड़ गया, जहां आसानी से सफलता नहीं मिलती। जब अमिताभ को टैलेंट हंट से कोई रिस्पांस नहीं मिला तो वे दोनों खुश हो गए थे। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।
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ऐसे मिली पहली फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’
अमिताभ बच्चन के फिल्मों में आने के सपने को पूरा करने के लिए उनके भाई अजिताभ ने भी काफी मदद की। वह अपने भाउनकी फोटो खींचते थे। इस सबके बीच अमिताभ बच्चन की कोलकाता में नौकरी लग गई। उन्हीं दिनों अजिताभ दिल्ली से मुंबई जा रहे थे कि ट्रेन में उनकी एक मित्र मिली, जिसने बताया कि ख्वाजा अब्बास अपनी फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' के लिए कलाकारों की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने दोस्त को अमिताभ बच्चन की फोटो दे दी। अब्बास ने फोटो देखने के बाद कहा कि लड़के को बुलाओ। जब अमिताभ बच्चन ऑडिशन के लिए उनके पास पहुंचे तो उन्होंने हैरान होकर पूछा, क्या तुम बच्चन के बेटे हो और घर से भागकर आए हो? अमिताभ ने कहा, 'नहीं उन्हें पता है', लेकिन अपनी तसल्ली के लिए उन्होंने हरिवंश राय बच्चन को तार भेजा और पूछा कि क्या वह अमिताभ बच्चन के फिल्मों में काम करने से सहमत हैं। इस पर हरिवंश राय बच्चन ने जवाब दिया कि अगर अमिताभ में योग्यता लगती है तो हमारी सहमति है, लेकिन अगर नहीं लगती तो उसे समझा कर वापस भेज दो। इसके बाद ख्वाजा अब्बास से ऑडिशन लिया और अमिताभ को फिल्म के लिए पांच हजार रुपये में साइन कर लिया।
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अमिताभ बच्चन ने 1969 में 'सात हिंदुस्तानी' से बॉलीवुड इंडस्ट्री में कदम रखा था। इस फिल्म को उस जमाने के जाने माने लेखक और फिल्मकार ख्वाजा अहमद अब्बास ने जब बनाया था, तो कभी नहीं सोचा होगा कि यह इतिहास मे अमर हो जाएगी और अमिताभ बच्चन की बदौलत इसे बार-बार याद किया जाएगा। यह फिल्म गोवा को पुर्तगाली शासन से आजाद कराने की कहानी पर बनी थी। फिल्म के लिए ख्वाजा अब्बास ने देश के अलग-अलग हिस्सों से विभिन्न धर्म के लोगों को चुना था और सभी को उनके धर्म या राज्य के अनुसार भूमिका न देकर अलग भूमिका दी गई थी।
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फिल्म को मिले कई राष्ट्रीय पुरस्कार
'सात हिंदुस्तानी' को उस वर्ष राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। वहीं, फिल्म के गाने 'आंधी आए कि तूफान कोई गम नहीं' और 'एक मंजिल पर सबकी निगाहें' के लिए कैफी आजमी को भी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हालांकि इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन ने भी सर्वश्रेष्ठ नए अभिनेता के रूप में अवार्ड हासिल किया था, लेकिन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के रिकॉर्ड में उसका कोई जिक्र नहीं है। इसको लेकर अमिताभ बच्चन ने कहा था, मुझे पता नहीं कि क्यों उनके रिकॉर्ड में यह दर्ज नहीं है। मेरे पास उस अवार्ड की ट्रॉफी है, आप चाहें तो मेरे घर आकर देख सकते हैं।'
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