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40 की उम्र में अमरीश पुरी ने की पहली फिल्म, 'मोगैंबो' बन रचा इतिहास और बने सबसे खूंखार विलेन
हिंदी सिनेमा के मोगैंबो यानी की अमरीश पुरी की आज पुण्यतिथि है। 12 जनवरी की सुबह दिमाग की नस फट जाने के कारण मुंबई में उनका निधन हो गया था। मौत के वक्त उनकी उम्र 72 साल थी। उनका सबसे यादगार रोल था मिस्टर इंडिया के लिए मोगैंबो का। जिसका डायलॉग आज भी फेमस है। उन्होंने ज्यादातर विलेन की भूमिकाएं ही निभाईं। आइए आज हिंदी सिनेमा के खूंखार विलेन की जिंदगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।
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Amrish Puri
- फोटो : file photo
22 जून 1932 को जन्मे अमरीश पुरी ने 1971 में रेश्मा और शेरा से अपने फ़िल्मी जीवन की शुरुआत की थी लेकिन अभिनेता के रूप में उन्हें पहचान मिली निशांत, मंथन और भूमिका जैसी फिल्मों से। अमरीश पुरी नकारात्मक भूमिकाओं को वो इस ढंग से निभाते थे कि एक वक्त ऐसा आया जब हिंदी फिल्मों में 'बुरे आदमी' के रूप में लोग उन्हें पहचानने लगे। हिंदी सिनेमा के इतिहास में मोगैंबो को उनका सबसे लोकप्रिय किरदार माना जाता है।
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amrish puri
अमरीश पुरी की हिंदी सिनेमा में मांग इतनी थी कि एक समय ऐसा आया जब वह हिंदी फिल्मों के सबसे महंगे विलेन बन गए। कहा जाता है कि एक फिल्म के लिए वह एक करोड़ रुपये तक फीस ले लेते थे। लेकिन जहां मामला जान पहचान का होता था वहां अपनी फीस कम करने में भी उन्हें कोई गुरेज नहीं था। हालांकि ये आकंड़ा उन फिल्मों का है जिनका बजट ज्यादा होता था। अमरीश पुरी असल जीवन में बहुत ही अनुशासन वाले व्यक्ति थे। उन्हें हर काम सही तरीके से करना पसंद था। चाहे फिल्में हो या निजी जीवन का कोई भी काम।
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अमरीश पुरी
अमरीश पुरी का एक किस्सा बताया जाता है। एक बार अमरीश पुरी ने एन.एन. सिप्पी की एक फिल्म साइन की लेकिन किसी वजह से फिल्म की 2-3 साल तक शूटिंग शुरू नहीं हो पाई। जब फिल्म शुरू हुई तो अमरीश पुरी ने ज्यादा फीस मांगी। क्योंकि उस समय अमरीश पुरी की मांग ज्यादा थी। जब एन.एन. सिप्पी ने उन्हें इतनी फीस देने से इनकार किया तो उन्होंने फिल्म ही छोड़ दी।
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अमरीश पुरी
अमरीश पुरी ने अपनी फीस को लेकर एक इंटरव्यू में कहा था- जब मैं अपने अभिनय से समझौता नहीं करता तो मुझे फीस कम क्यों लेनी चाहिए। निर्माता को अपने वितरकों से पैसा मिल रहा है क्योंकि मैं फिल्म में हूं। लोग मुझे एक्टिंग करते हुए देखने के लिए थियेटर में आते हैं। फिर क्या मैं ज्यादा फीस का हकदार नहीं हूं? सिप्पी साहब ने अपनी फिल्म के लिए मुझे बहुत पहले से साइन किया था, इस वादे के साथ कि फिल्म पर एक साल में काम शुरू होगा। अब तीन साल हो गए हैं, और मेरी फीस बाजार के रेट के हिसाब से बढ़ गई है। अगर वह मुझे मेरे काम जितनी फीस नहीं दे सकते तो मैं उनकी फिल्म में काम नहीं कर सकता।
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