हिंदी सिनेमा के महाखलनायक कहे जाने वाले अभिनेता अमरीश पुरी आज के ही दिन दुनिया को अलविदा कह गए थे। 80 और 90 के दशक में कोई भी फिल्म इनकी क्रूरता के बिना पूरी तरह से संतुष्टि नहीं देती थी। इसी लोकप्रियता की वजह से इन्होंने अपने पूरे हिंदी सिनेमाई करियर में 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। इनकी दुर्जनता की चर्चा तो हॉलीवुड तक मशहूर थी। हॉलीवुड के सबसे बड़े निर्देशकों में से एक स्टीवन स्पीलबर्ग ने एक इंटरव्यू में कहा, 'अमरीश मेरे सबसे पसंदीदा विलेन हैं। ऐसा विलेन न तो कभी हुआ है और न ही होगा!' अमरीश पुरी की पुण्यतिथि पर हम आपको उनके सबसे अच्छे किरदारों में से कुछ किरदारों के बारे में बताते हैं।
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किरदार: जी डी ठकराल
फिल्म: मेरी जंग (1985)
इस फिल्म में अमरीश पुरी एक जाने माने वकील की भूमिका में नजर आए। एक ऐसा वकील जिसके लिए झूठ को सच और सच को झूठ साबित करना मामूली बात है। उस वकील की असली परीक्षा तब होती है जब उसका खुद का बेटा एक मर्डर केस में फंसता है और उसको बचाने में ठकराल की सारी चालें पतझड़ में पत्तों जैसी बिखर जाती हैं। वकील के किरदार में शानदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।
किरदार: मोगैंबो
फिल्म: मि. इंडिया (1987)
मोगैंबो खुश हुआ...! अमरीश पूरी का दूसरा नामकरण मोगैंबो इसी फिल्म से हुआ। यही वह किरदार है जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा। एक विलेन के तौर पर इस फिल्म में बोला गया उनका संवाद 'मोगैंबो खुश हुआ' हर बच्चे, बूढ़े और जवान की जुबान पर चढ़ गया था। एक विलेन को क्रूरता के गुर अगर सीखने हों तो वह इस किरदार का अनुसरण करके सफलता हासिल कर सकता है।
किरदार: भुजंग/ भैरव सिंह
फिल्म: त्रिदेव (1989)
कहने को तो यह कहानी करण (सनी देओल), रवि (जैकी श्रॉफ) और जय (नशीरूद्दीन शाह) की है, लेकिन इन तीनों की जिंदगी बदहाल करना और उसमें तूफान लेकर आना भुजंग (अमरीश पुरी) का ही काम है। छोटी सी जगह से उठकर पाप का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा करके भुजंग बहुत शक्तिशाली विलेन बन गया था। अपने चिर परिचित अंदाज में अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामित किया गया।
किरदार: चुनिया मामा
फिल्म: सौदागर (1991)
इस फिल्म में अमरीश पुरी की नकारात्मकता उनके अजीब से नाम और अजीब से मेकअप से ही झलकती है। अंदाजा तो पहले सीन से लग जाता है कि इस फिल्म में आग लगाने का काम इन्हीं को सौंपा गया है। थोड़ी ही देर में वह अपना असली रंग दिखाकर आपके अंदाजे पर सत्यता की मुहर भी छाप देते हैं। एक गृह क्लेश में भी वह इतनी सफाई से अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं कि शायद ही कोई विलेन ऐसे कलेवर में ढल पाए। इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ विलेन के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।