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Anand Bakshi: लिरिसिस्ट कभी नहीं बनना चाहते थे आनंद बख्शी, राज कपूर की बदौलत मिला गाने का मौका

Fri, 21 Jul 2023 10:05 AM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: साक्षी Updated Fri, 21 Jul 2023 10:05 AM IST
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Anand Bakshi birth anniversary know unknown facts about poet and lyricist and his career songs life
आनंद बख्शी - फोटो : amar ujala

आनंद बख्शी बॉलीवुड इंडस्ट्री का बड़ा नाम थे। उन्होंने इंडस्ट्री को कई हजार बेहतरीन गानों का तोहफा दिया है। उनके जरिए लिखे गए गाने आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े रहते हैं। आनंद भले ही हमारे बीच न हो, लेकिन उनके गानों के जरिए वह हमेशा फैंस के दिल में जिंदा रहेंगे। आनंद बख्शी के लिरिक्स की सुंदरता की वजह से लोग उन्हें शब्दों का बाजीगर भी कहा करते थे। आनंद बख्शी ने अपने सात दशक के करियर में बॉलीवुड को करीब 4000 से अधिक गाने दिए। आज आनंद बख्शी का जन्मदिवस है। चलिए इस खास मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें

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आनंद बख्शी

आनंद बख्शी का जन्म रावलपिंडी में एक मोहयल ब्राह्मण परिवार में 21 जुलाई, 1930 को हुआ। जब वह सिर्फ पांच साल के थे, तब उनकी मां की मृत्यु हो गई। भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय उनके पूरा परिवार भारत आ गया और दिल्ली में रहने लगा। 14 साल की उम्र में आनंद बख्शी कराची में ‘रॉयल इंडियन नेवी’ शामिल हो गए थे। वहीं, उन्होंने एचआईएमएस दिलावर में काम किया, लेकिन आनंद को नेवी से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद वह आर्मी में शामिल हुए। 12 अप्रेल साल 1950 को वह बोम्बे (अब मुंबई) आ गए और इसी साल उन्होंने गायक और लिरिसिस्ट के तौर पर गाना और लिखना शुरू कर दिया।

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आनंद बख्शी - फोटो : सोशल मीडिया

आनंद बख्शी के जरिए लिखे गए गाने सदाबहार बन गए। यहां तक कि वह केवल आठ मिनट में ही गाना लिख देते थे, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि शब्दों के जाल से खेलने वाले आनंद कभी लिरिसिस्ट बनना ही नहीं चाहते थे। दरअसल, वह गायक बनने का सपना लिए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि, उनकी मंजिल कहीं और ही थी। उन्होंने गाने लिखने शुरू किए और अपने शब्दों का जादू चलाकर करोड़ों लोगों का दिल जीता और वह हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री के लेजंड्री लिरिसिस्ट में से एक हो गए।
 

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आनंद बख्शी - फोटो : सोशल मीडिया

जब वह मुंबई लौटे तो वह अभिनेता भगवान दादा से मिले। आनंद के शब्दों की कला को देख भगवान दादा बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने उन्हें अपनी फिल्म 'भला आदमी' में उन्हें लिरिक्स लिखने का मौका दिया। हालांकि, फिल्म से आनंद बख्शी को कोई पहचान तो नहीं मिली, लेकिन उन्हें इंडस्ट्री के अंदर घुसने का एक रास्ता मिला। धीरे धीरे उन्होंने इंडस्ट्री में अपने कदम जमाए। गाने लिखते हुए उन्हें अपना सपना पूरा करने का मौका भी आखिरकार मिल ही गया। कहा जाता है कि आनंद बख्शी को साल 1963 में राज कपूर ने अपनी फिल्म 'मेहंदी लगी मेरे हाथ' में गाने का मौका दिया, लेकिन उन्हें लोकप्रियता साल 1965 में आई फिल्म 'जब जब फूल खिले' के गाने 'परदेसियों से न अखियां मिलाना', 'ये समा समा है ये प्यार का' जैसे गानों से मिली। इन गानों से आनंद बख्शी ने म्यूजिक लवर्स के दिलों पर जमकर राज किया। 

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anand bakshi

आनंद बख्शी को रिकॉर्ड ब्रेकिंग फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के 40 नॉमिनेशंस मिले थे, लेकिन इतनी बार नॉमिनेट होने वाले दिग्गज को केवल चार बार ही अवॉर्ड से नवाजा गया। आनंद ने इंटस्ट्री के मशहूर और बड़े-बड़े म्यूजिक कम्पोजर्स के साथ काम किया। हालांकि, उनकी जोड़ी आरडी बर्मन के साथ खूब जमीं। उन दोनों ने मिलकर कई शानदार गाने इस बॉलीवुड को दिए। फिल्म 'एक दूजे के लिए' के गाने 'तेरे मेरे बीच में', 'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे', 'ओम शांति ओम', 'आदमी मुसाफिर है', 'महबूबा महबूबा', 'हम तुम एक कमरे में बंद हों', 'कोरा कागज था', 'सावन का महीना', ऐसे ही और भी कई सदाबहार गीत आनंद ने इंडस्ट्री को दिए। इन गानों का जलवा आज भी उसी तरह कायम है, जितना पहले के जमाने में था। अपने आखिरी समय में वह दिल की बीमारी से जूझ रहे थे। दरअसल, उन्हें स्मोकिंग की आदत थी, जो उनकी मौत की वजह भी बनी। 30 मार्च 2002 को आनंद बख्शी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया और अपने पीछे छोड़ गए अनगिनत बेहतरीन गाने, जिनके जरिए वह आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। 

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