मशहूर गीतकार आनंद बख्शी ने लगभग चार दशक तक सुनने वालों को मंत्रमुग्ध किया। इनके लिखे गाने गाकर ही किशोर कुमार समेत कई गायकों ने अपनी पहचान बनाई, इन्हीं के गीतों ने राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन जैसे स्टार को सुपरस्टार बनाया। आज आनंद बख्शी साहब की पुण्यतिथि है। वे अपनी जवानी में टेलीफोन ऑपरेटर बनकर सेना में शामिल हो गए लेकिन सिनेमा की दुनिया में आने की ख्वाहिश ने उन्हें इससे बांधे रखा और आखिरकार यह प्रयास ‘बदला’ फिल्म के साथ हुआ पूरा हुआ।
पुण्यतिथि: जब बंदूक चलाना छोड़ आनंद बख्शी ने पकड़ ली कलम, कहलाए सदाबहार गीतों के 'शिल्पकार'
आनंद बख्शी के पिता रावलपिंडी में बैंक मैनेजर थे। जब वह महज दस साल के थे तभी उनकी मां का निधन हो गया। बंटवारा हुआ तो बख्शी साहब का परिवार शरणार्थी बनकर हिन्दुस्तान आ गया। जब मायानगरी में कुछ ना हुआ तो आनंद बख्शी ने फिर से सेना ज्वाइन कर ली और कुछ समय तक वहीं काम करते रहे।
Amar Prem, Aradhana, Jeene Ki Raah, Sholay, Lamhe, DDLJ, Taal
Tributes to "People's Poet", one of the greatest lyricists, #AnandBakshi ji on death anniversary
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तीन साल सेना में नौकरी करने के बाद उन्होंने तय किया कि उनकी जिंदगी का मकसद बंदूक चलाना नहीं गीत लिखना है। उन्हें पहली बार गीत लिखने का मौका 1957 में मिला लेकिन सफलता उनसे दामन चुराती रही। 1963 में निर्देशक कपूर ने उन्हें अपनी फिल्म 'मेहंदी लगे मेरे हाथ' के लिए गीत लिखने का अवसर दिया। उसके बाद सफलता ने कभी आनंद बख्शी का साथ नहीं छोड़ा।
अपने फिल्मी करियर में बख्शी साहब ने 4000 से ज्यादा गीत लिखे। उन्होंने अपने करियर में अमर प्रेम, एक दूजे के लिए, सरगम, बॉबी, हरे रामा हरे कृष्णा, शोले, अपनापन, हम, मोहरा, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, दिल तो पागल है, परदेस, ताल और मोहब्बतें जैसी फिल्मों के लिए गाने लिखे।
आनंद बक्शी ने फिल्मकारों की कई पीढ़ियों के साथ काम किया। उनकी सबसे बड़ी खूबी ये थी कि समय के साथ उनके गीतों का लहजा बदलता रहा। आनंद बख्शी वो नाम है जिसके बिना म्यूजिकल फिल्मों को शायद वो सफलता नहीं मिलती जिनको बनाने वाले गर्व करते हैं। सिगरेट के अत्यधिक सेवन की वजह से वह फेफड़े तथा दिल की बीमारी से ग्रस्त हो गए। आखिरकार 82 साल की उम्र में अंगों के काम करना बंद करने के कारण 30 मार्च, 2002 को उनका निधन हो गया।
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