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एक साल में 5 हिट फिल्में देकर इस डायरेक्टर ने कमाए करोड़ों, अब शाहरुख संग कर रहे अगली फिल्म

Sun, 25 Nov 2018 01:42 PM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Sun, 25 Nov 2018 01:42 PM IST
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anand l rai shah rukh khan film zero director reveals his strategy
zero - फोटो : instagram

बीते दशक में सशक्त पहचान बनाने वाले निर्देशकों में आनंद एल. राय प्रमुख हैं। दिल्ली के मध्यमवर्गीय परिवार से आए राय की मुहर वाली फिल्में परिवार के साथ देखी जा सकती हैं। वह शोर-शराबे से दूर खामोशी से काम करते हैं। कैसे बुनते हैं वह अपनी फिल्में और किस अंदाज में करते हैं काम? इन सभी मुद्दों पर अमर उजाला के लिए रवि बुले से हुई उनकी बातचीत के अंश...

anand l rai shah rukh khan film zero director reveals his strategy
shahrukh khan, anand l rai

आपकी पहचान निर्देशक के तौर पर बनी लेकिन आप लगातार 8-9 फिल्म निर्माण में लगे हैं। लगातार फिल्म निर्माण की क्या वजह?
कभी सोचा नहीं था कि काम में इतना व्यस्त हो जाऊंगा। 'रांझणा', 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स', 'निल बटे सन्नाटा', 'हैप्पी भाग जाएगी', 'शुभ मंगल सावधान', 'न्यूटन', 'मुक्काबाज', 'मेरी निम्मो', 'हैप्पी फिर भाग जाएगी', 'मनमर्जियां' और 'तुंबाड' जैसी फिल्में कोई भी निर्माता बनाना चाहेगा। मुझे लगा कि इनमें अपना समय और पैसा लगाना बेहतर होगा। नतीजा सामने है।

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Tanu Weds Manu Returns - फोटो : instagram

इतने कम समय में इतनी फिल्में बनाना कैसे हुआ?
महत्वाकांक्षी नहीं हूं लेकिन मैं समय की बहुत कद्र करता हूं। ऐसी फिल्में समय के साथ चलने की मांग करती हैं। निर्देशक के तौर पर जब काम किया तो मुझसे जुड़ने वाले ज्यादातर लेखक-निर्देशक थे। मुझे लगा कि इनके पास जो कहानियां हैं, उन्हें लोगों तक पहुंचा सकता हूं। 'तनु वेड्स मनु' के लिए काफी मशक्कत की थी लेकिन इसकी कामयाबी के बाद लगा कि यही रास्ता है, जिससे अच्छी कहानियों को लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
  
किस तरह कहानी से निर्देशन तक सफर तय करते हैं?
कसी कहानी पर फिल्म तभी बनाता हूं, जब मैं कहानी के प्यार में पड़ता जाता हूं। तीन साल लग जाते हैं, एक कहानी को फिल्म बनाने में। मैं जल्दबाजी नहीं करता लेकिन बहुत देर भी करना पसंद नहीं।

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anand l rai shah rukh khan film zero director reveals his strategy
anand l rai, shah rukh khan - फोटो : file photo

अपने प्रोडक्शन हाउस के दूसरे निर्देशकों की कहानियों से कैसे जुड़ते हैं?
मैं अपनी धीमी रफ्तार के कारण जान गया था कि बहुत कम कहानियां कह पाऊंगा। तब मुझे लगा कि क्यों न ऐसे लोगों से जुड़ा जाए जो मेरी तरह कहानियां सोचते हैं। मुझे लगा इसके जरिए मैं रचनात्मक रूप से सक्रिय रहूं। यह मेरे लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि कहानियां सुनने और सुनाने में मुझे बहुत मजा आता है।

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anand l rai shah rukh khan film zero director reveals his strategy
anand l rai - फोटो : file photo

कहानियां सुनाने के लिए सिनेमा ही क्यों चुना?
मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। मेरे माता-पिता टीचर थे। उस दौर में बच्चों को या तो इंजीनियर बनाने की बात होती थी या डॉक्टर। हालांकि, पिता अंग्रेजी के अध्यापक थे। इंजीनियरिंग करते-करते अहसास हुआ कि मैं यह हूं ही नहीं। इससे शायद मुझे अच्छी जॉब मिल जाए लेकिन मेरे अंदर साहित्य और मनोरंजन के अंकुर फूट रहे थे आैर धीरे-धीरे यह अहसास मजबूत होता गया। मुझे यह समझ आया कि मैं लोगों को पढ़-परख सकता हूं। रिश्ते मुझे समझ आते हैं। मैं जिंदगी की परतों में झांक सकता हूं। तब मैं कहानियों की तरफ आकर्षित हुआ और तय किया कि लोगों को कहानियां सुनाऊंगा।

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