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Anandji Exclusive: लड़की ने चिट्ठी में भेजा लिपस्टिक से बना दिल, साथ में फूल और इंदीवर ने लिखा, फूल तुम्हें...

Sun, 24 Sep 2023 03:50 PM IST
Virendra Mishra वीरेंद्र मिश्र
Updated Sun, 24 Sep 2023 03:50 PM IST
सार

हिंदी सिनेमा की मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी आनंद जी ने हिंदी सिनेमा में एक से बढ़कर एक सदाबहार हिट गाने दिए हैं। वहीं, इस जोड़ी के आनंदजी ने अपने करियर और संगीत की दिलचस्पी से जुड़ी कई अहम बातें अमर उजाला के साथ साझा की हैं। 

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Anandji Exclusive interview of Kalyanji Anandji music duo interesting stories Mukesh raj kapoor nagin been cla
आनंदजी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

हिंदी सिनेमा की मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी आनंद जी ने हिंदी सिनेमा में एक से बढ़कर एक सदाबहार हिट गाने दिए हैं। फिल्म ‘छलिया’ के पोस्टर पर पहली बार इस संगीतकार जोड़ी का नाम दिखा। भारत के लोक संगीत पर आधारित सबसे ज्यादा गीत बनाने वाली इस जोड़ी के आनंदजी से ‘अमर उजाला’ की एक एक्सक्लूसिव मुलाकात।

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आनंदजी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आनंदजी, संगीत का सिलसिला आपके जीवन में कहां से शुरू होता है?

मुंबई के गिरगांव में जहां हम लोग रहते थे। वहां बहुभाषीय लोग रहते थे। भाषाओं को सीखने का शौक था मुझे। फिल्म इंडस्ट्री में जाने जैसा कोई इरादा तब नहीं था। एक दिन हमें स्कूल से रिकॉर्डिंग में बुलाया गया। उन दिनों लाइव रिकॉर्डिंग के साथ साथ शूटिंग भी होती थी। स्कूल के कुछ बच्चों का चयन करके गाने के लिए बुलाया गया था। स्कूल की म्यूजिक क्लास से हमारा भी चयन हुआ। शूटिंग के माहौल को देखकर हर चीज के बारे में जानने की उत्सुकता हुई। मेरी बातें सुनकर सबको मजा आता था। बड़े भाई कल्याणजी उन दिनों बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे। उनकी संगीत में दिलचस्पी काफी थी।

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आनंदजी-मनोज कुमार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म 'नागिन' के गाने 'मन डोले मेरा तन डोले' में कल्याणजी को नागिन बजाने की क्या कहानी है?

उन दिनों क्लेवियालिन नामक एक नया इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंट आया था। पहली बार इस इंस्ट्रूमेंट का प्रयोग साउथ की फिल्म 'नागपंचमी' में किया गया था। इस इंस्ट्रूमेंट को मेरे बड़े भाई साहब भी बजाते थे। जब 'नागपंचमी' फिल्म रिलीज हुई तो निर्देशक नंदलाल जसवंतलाल ने सोचा कि क्यों न पूरी फिल्म ही नाग पर बनाई। फिर ‘नागिन’ का निर्माण शुरू हुआ। इस फिल्म का संगीत हेमंत कुमार ने दिया था और इस फिल्म में पहली बार नागिन बीन मेरे बड़े भाई कल्याणजी ने बजाई थी। इस फिल्म के पांचों गाने बिनाका गीतमाला में खूब बजे।  

 

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कल्याणजी-लता मंगेशकर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आप लोगों की संगीतकार के तौर पार शुरुआत कैसे हुई और पहली फिल्म में मौका कैसे मिला?

निर्माता-निर्देशक मनमोहन देसाई के बड़े भाई सुभाष देसाई फिल्म उन दिनों 'सम्राट चन्द्रगुप्त' का निर्माण कर रहे थे। उन्होंने भाई साहब को कई जगह क्लेवियोलिन देखा था। सुभाष देसाई ने ही अपनी फिल्म में संगीत का मौका दिया। इस तरह से संगीतकार के तौर पर 'सम्राट चंद्रगुप्त' से हमारी शुरुआत हुई। मैं भी साथ में जुड़ गया। इस फिल्म का गीत 'चाहे पास हो चाहे दूर हो' चल पड़ा। यह गाना बहुत लोकप्रिय हुआ। उस जमाने के लोग आज भी उस गीत को बहुत याद करते हैं। धीरे धीरे गाने चलने लगे तो हमें लगा कि अब यह काम करना चाहिए।

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कल्याणजी,आनंदजी,राज कपूर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

राजकपूर की फिल्मों में से जुड़ना कैसे हुआ क्योंकि उनकी फिल्मों में तो शंकर-जय किशन का ही संगीत रहता था?

सुभाष देसाई अपने छोटे भाई मनमोहन देसाई को निर्देशक के रूप में स्थापित करना चाह रहे थे। उन्होंने तय किया कि एक फिल्म राज कपूर के साथ, एक दिलीप कुमार के साथ और एक फिल्म शम्मी कपूर के साथ बनानी है। सभी फिल्मों में संगीत के लिए हमें जिम्मेदारी मिली। राजकपूर की फिल्मों में शंकर-जय किशन का संगीत होता था और मुकेश गीत गाते थे। राज कपूर ने कहा कि गाने मुकेश गाएंगे और उसी स्टाइल में होंगे जिस तरह से वह गाते हैं, लेकिन इस फिल्म में संगीतकार के तौर पर दोनों भाइयों का नाम कल्याणजी आनंदजी डाल देते हैं। यहां से हमारी जोड़ी का नाम कल्याणजी आनंदजी पड़ा। इससे पहले संगीतकार के तौर पर बड़े भाई साहब का ही नाम पोस्टर पर जाता था, कल्याणजी  वीरजी शाह के नाम से। वीरजी शाह हमारे पिता का नाम है। 'छलिया' से पहले फिल्म 'मदारी' का गीत 'दिल ढूंढने वाले जादूगर' खूब लोकप्रिय हुआ था।

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