अनिल कपूर का आज 63वां जन्मदिन है । बढ़ती उम्र के बावजूद चुस्ती और फुर्ती के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता अनिल कपूर ने हिंदी की 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों और टीवी शोज में काम करके भी भारत का नाम रोशन किया। अपने 40 साल के करियर में फिल्म अभिनेता और निर्माता के रूप में उन्हें छह फिल्मफेयर और दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। बाल कलाकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले निर्माता सुरिंदर कपूर के बेटे अनिल ने कामयाबी की नई ऊंचाइयों को छुआ है। उनके जन्मदिन पर जानिए उनके 10 बेहतरीन किरदारों के बारे में, जिन्होंने बोनी के छोटे और संजय के बड़े भाई को बनाया हिंदी सिनेमा का सुपरस्टार। फिल्म युद्ध में बोली गई उनकी फेवरिट लाइन की तरह ही ये सारे किरदार हैं, एकदम झकास...
अनिल कपूर के ये 10 किरदार हैं एकदम झकास, इन्हीं में से एक ने दिलाया एक्टिंग का नेशनल अवार्ड
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किरदार : अरुण वर्मा
फिल्म : मेरी जंग (1985)
बेहतरीन संवादों, गंभीर जज्बात, रोमांस, और मारधाड़ से भरपूर फिल्म 'मेरी जंग' सर्वश्रेष्ठ कोर्टरूम ड्रामा फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में अनिल कपूर अरुण वर्मा के किरदार में एक बेटे की सभी जिम्मेदारियों को निभाते नजर आए। साथ ही उन्होंने एक भाई का भी किरदार बखूबी निभाया है। अपनी बीमार मां के सामने बेचारे बेटे के रूप में अनिल कपूर का चेहरा सबकुछ बयां करता है। परिपक्व अंदाज में अदालत में पेश की जाने वाली दलीलें उन्हें असली वकील समझने पर मजबूर कर देती हैं। इस फिल्म में अनिल कपूर के सफल अभिनय ने उन्हें बड़े अभिनेताओं की लाइन में खड़ा कर दिया। इस फिल्म में उनका अभिनय उनके सर्वश्रेष्ठ अभिनयों में से एक माना जाता है। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया था।
किरदार : अरुण वर्मा
फिल्म : मिस्टर इंडिया (1987)
मोगैंबो खुश हुआ ...। जितना इस फिल्म के लिए मोगैंबो को याद किया जाता है, उतना ही लोगों को अरुण वर्मा याद है। उस नेकदिल, बेरोजगार और अनाथालय चलाने वाले अरुण वर्मा को कौन याद नहीं रखेगा? वह बच्चों का भाई है, पिता है, माता है और उनका प्राथमिक स्कूल भी है। जब उसके बच्चे परेशान होते हैं तो वह भी परेशान होता है। जब उसके बच्चे भूखे रहते हैं तो वह भी भूखा रहता है। जब एक बच्ची की मौत होती है, तो... वह बुरी तरह टूट जाता है। फिल्म के हर पहलू में अरुण वर्मा खरा सोना निकला है। फिल्म में एक्शन, रोमांस, इमोशन आदि में अनिल कपूर बेजोड़ हैं।
किरदार : महेश देशमुख/मुन्ना
फिल्म : तेजाब (1988)
फिल्म तेजाब का नाम जब आता है तो माधुरी दीक्षित पर फिल्माया हुआ एक गाना याद आता है। एक दो तीन...। लेकिन फिल्म के मुख्य कलाकार महेश देशमुख उर्फ मुन्ना के रूप में अनिल कपूर को कौन भूल सकता है? शुरुआत से लेकर अंत तक फिल्म में यही तो दिखाई देते हैं। प्यार हो, तकरार हो या गुंडों से मारामारी हो, मुन्ना सबसे बेहतर दिखाई देते हैं। शानदार संवादों का प्रवाह और चेहरे के सच्चाई वाले भाव अपने काम में अव्वल और वफादार होने का सबूत देते हैं। माधुरी के साथ उनकी बेरुखी और बाद में बेइंतहा प्यार, इस किरदार की विविधता को दर्शाते हैं। इस फिल्म में अद्वितीय अभिनय के लिए अनिल कपूर को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड से सुशोभित किया गया।
किरदार : लखन प्रताप सिंह
फिल्म : राम लखन (1989)
जब भी अनिल कपूर का नाम आता है तो एक गाना जरूर दिमाग में आता है। सजनों का सजन, मेरा नाम है लखन। ये गाना सुनकर आज भी लोग ए जी, ओ जी करना शुरू कर देते हैं। यह गाना अनिल कपूर पर ही फिल्माया गया है। इस फिल्म में इंस्पेक्टर लखन प्रताप सिंह का किरदार बहुत ही लाजवाब है। अपनी मां की कही बात "गुलाम बनोगे तो कुत्ता समझकर लात मारेगी दुनिया, और गुलाम बनाओगे तो शेर समझकर सलाम करेगी दुनिया" को लखन, जब अपने भाई राम को सुनाता है, तो उस सीन में सिर्फ लखन ही नजर आता है। ऐसे और भी कई सीन हैं जिनमें अनिल कपूर अपने अभिनय के दम पर फिल्म पर राज करते नजर आते हैं।