मशहूर शायर और कवि राहत इंदौरी भले ही इस दुनिया को अलविदा कह गए हों लेकिन उनकी लिखी कविताएं, शायरियां और उनसे जुड़े किस्से उन्हें उनके चाहने वालों के दिलों में हमेशा जिंदा रखेंगे। 'बुलाती है पर जाने का नहीं' जैसी लिखीं उनकी लाइनें तो आजकल के युवाओं के बीच अलग- अलग जगहों पर इस्तेमाल करने का फलसफा बन गई हैं। राहत इंदौरी सिर्फ शायरी और कविताएं ही नहीं करते थे, बल्कि उन्होंने हिंदी फिल्मों जैसे, खुद्दार, मुन्ना भाई एमबीबीएस, मिशन कश्मीर, करीब, इश्क, घातक जैसी फिल्मों के लिए गीत भी लिखे हैं।
EXCLUSIVE: अनु मलिक ने सुनाया किस्सा, जब गाना लिखते- लिखते मुंबई से इंदौर निकल गए थे राहत इंदौरी
सिनेमा में गीतकार राहत इंदौरी की संगीतकार अनु मलिक से खूब पटी। राहत के इंतकाल पर अनु मलिक गम जाहिर करते हुए कहते हैं, 'यह मेरे लिए बहुत दुखद खबर है। वह बहुत ही जिंदादिल इंसान थे। कमाल के शायर थे। उनसे मेरी पहली मुलाकात है महेश भट्ट की फिल्म 'सर' के दौरान हुई थी जब उन्होंने वहां 'आज हमने दिल का हर किस्सा तमाम कर दिया' लिखा था।'
अपनी बात जारी रखते हुए अनु कहते हैं, 'जब उन्हें इंदौर से गीत लिखने के लिए बुलाया गया तो वह बहुत खुश हुए। उन्हें महेश और मुकेश भट्ट से मिलवाया गया और फिल्म का यह गीत लिखने के लिए कहा गया। यह गाना हिट हो गया तो हमारा सिलसिला शुरू हुआ। वह शायर तो कमाल के थे लेकिन उन्हें ढूंढना बहुत मुश्किल था।'
राहत इंदौरी का एक संस्मरण सुनाते हुए अनु मलिक बताते हैं, 'एक बार वह एकदम मूड में थे और गाना लिख रहे थे। यह किस्सा शायद फिल्म 'करीब' के गीत 'चोरी चोरी जब नजरें मिली' के दौरान का है। अचानक से उन्हें क्या सुझा? वह उठे और कहते हैं कि मैं एक मिनट में आता हूं। एक मिनट का कहकर गए और घंटों बीत गए। जानकारी लेने पर पता चला कि वह तो वापस इंदौर निकल गए। इधर गाना अधूरा था इसलिए उन्हें फिर से पकड़ कर लाया गया और गाना लिखवाया गया। दरअसल, वह भूल जाते थे। वह हमेशा अपनी धुन में रहते थे, अपने ख्यालों में खोए रहते थे। लेकिन, एक बार लिखने बैठ गए तो कमाल ही होता।'
राहत इंदौरी को याद करते हुए अनु मलिक बताते हैं कि 'चोरी चोरी जब नजरें मिली' गीत का मुखड़ा खुद उन्होंने लिखा था। वह बताते हैं, 'जब मैंने यह मुखड़ा राहत भाई के सामने पेश किया तो उन्होंने कहा कि बहुत अच्छा लिखा है। और उन्होंने इसे फिर पूरा गीत बना दिया। ऐसे ही जब 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' पर काम चल रहा था। राजकुमार हिरानी साहब बैठे हुए थे। मैं बस ऐसे ही गुनगुना रहा था और 'देख ले, देख ले'। बस इतना ही मैं बोल रहा था। इसी चीज को पकड़कर उन्होंने पूरा गाना 'देख ले, आंखों में आंखें डाल' बना डाला। वह ऐसे इंसान थे कि वह किसी भी स्थिति पर कुछ भी लिख सकते थे।'