अनुपम खेर को क्या पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफ करना भारी पड़ा और उन्हें फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट पुणे के चेयरमैन पद से इस्तीफा देना पड़ गया। अटकलों का बाजार गर्म है। जानकार कह रहे हैं कि भाजपा समर्थक खेर ने जब 27 अक्तूबर को ट्विटर पर मनमोहन सिंह की तारीफ की तो कई लोगों की भौंहें तन गई। इसके दो दिन बाद 11 महीनों से रुकी पड़ी एफटीआईआई की गवर्निंग काउंसिल के गठन पर फैसला हुआ तो लगा कि अब संस्थान के रुके हुए फैसले रफ्तार पकड़ेंगे।
आखिर क्यों इस्तीफा देने को मजबूर हुए अनुपम खेर, वजह कहीं मनमोहन सिंह तो नहीं?
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खेर के मार्गदर्शन में इंस्टीट्यूट के काम को गति मिलेगी, परंतु अगले ही दिन खेर ने इस्तीफे की घोषणा कर दी। इससे इंस्टीट्यूट के छात्र और काउंसिल के सदस्य हैरान रह गए। अब इस्तीफे पर तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं। अनुपम मनमोहन सिंह के यूपीए कार्यकाल पर आधारित फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री की भूमिका निभा रहे हैं। वह हमेशा भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक रहे हैं। उन्होंने कई बार कांग्रेस और उसके नेतृत्व में पिछली सरकारों और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से मनमोहन सिंह की आलोचना भी की।
इस फिल्म की शूटिंग खत्म होने तक अनुपम खेर का हृदय परिवर्तन हो गया। सिंह की भूमिका निभाते हुए अनुपम को कुछ अनुभव हुए कि उन्होंने ईमानदारी से मनमोहन के बारे में कह दिया कि इतिहास आपका गलत आकलन नहीं करेगा। वह यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि यह मेरे दिल के करीब फिल्मों में से है। मनमोहन सिंह के रूप में मुझे बतौर अभिनेता उन्हें जीने और उनकी जीवन की यात्रा करने का मौका मिला, उसके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं। अनुपम ने कहा कि यह रोल निभाते हुए मैंने बहुत कुछ सीखा।
अनुपम ने इसे उन्होंने ग्रेट लर्निंग एक्सपीरियंस बताते हुए कहा कि एक बात तय है कि इतिहास आपका गलत आकलन नहीं करेगा। मनमोहन को लेकर खेर की एकाएक राय बदल जाना कई लोगों के गले नहीं उतरा। फिल्म से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि इसमें मनमोहन सिंह के बारे में ऐसी कई बातें सामने आएंगी जो उनके विरोधियों के साथ कांग्रेस को भी पसंद नहीं आएंगी। माना जा रहा है कि फिल्म के बाद खेर भी अपने वर्तमान बयानों के पश्चात नहीं कह सकेंगे कि बतौर एक्टर उन्होंने सब किया और कहा। अत: पहले ही उन्होंने मर्जी अथवा दबाव में खुद को सरकारी जिम्मेदारी से मुक्त कर लिया।
हंसल मेहता क्रिएटिव प्रोड्यूसर हैं और विजय रत्नाकर गुट्टे ने इसे डायरेक्ट किया है। सूत्रों के मुताबिक अनुपम खेर द्वारा मनमोहन सिंह का किरदार निभाने तक सब ठीक था परंतु इसके आगे की बातें उनके राजनीतिक विचारों के लिए मुश्किलें पैदा करने वाली रहीं। यही कारण है कि मनमोहन की तारीफ के तीन ही दिन बाद 31 अक्तूबर को उन्होंने एटीआईआई के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। कारण बताया कि वह 2018 से 2019 के आगामी नौ महीनों में बहुत व्यस्त रहने वाले हैं और उन्हें अमेरिका में रहना होगा। लोग सवाल उठा रहे हैं क्योंकि पिछले साल अक्तूबर में नियुक्ति के बाद भी वह इस जिम्मेदारी के समानांतर फिल्मों में व्यस्त थे। अत: अनुपम खेर द्वारा अचानक इस इस्तीफे पर माना जा रहा है कि अंदर की कहानी कुछ और है। जो आने वाले दिनों में सामने आ सकती है।